जामताड़ा से दिल्ली तक कोल गैसीफिकेशन मिशन तेज, ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर फोकस

मध्य पूर्व में ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध और तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार पेट्रोलियम उत्पादों के विकल्प के रूप में ऊर्जा के नए स्रोतों पर तेजी से काम कर रही है। इस दिशा में कोयले से गैस बनाने यानी कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

ईसीएल के अधिकारियों ने जामताड़ा डीसी से की मुलाकात।

केंद्र सरकार ने हाल ही में नई दिल्ली में सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एक रोड शो आयोजित किया, वहीं दूसरी ओर कोल इंडिया की अनुषंगी इकाई ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) झारखंड में अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन (यूसीजी) परियोजना को गति देने में जुट गई है।

नई दिल्ली में आयोजित रोड शो में नीति निर्माताओं, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत, निवेशकों, वित्तीय संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे और कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

जामताड़ा के कास्ता में चल रहा पायलट प्रोजेक्ट

इधर, ईसीएल पांडवेश्वर क्षेत्र के जीएम जियोलॉजी भास्कर भट्टाचार्य और क्षेत्रीय महाप्रबंधक अमिताभ भट्टाचार्य ने झारखंड के जामताड़ा उपायुक्त आलोक कुमार से मुलाकात की। बैठक में जामताड़ा जिले के कास्ता ब्लॉक में प्रस्तावित अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन परियोजना पर चर्चा हुई। जामताड़ा के कास्ता में कोल गैसीफिकेशन के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।

अधिकारियों ने जामताड़ा प्रशासन से परियोजना के लिए सहयोग की अपील की। बैठक में परियोजना स्थल तक पहुंचने वाले सड़क नेटवर्क और भूमि सर्वेक्षण से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। उपायुक्त ने भारत के पहले यूसीजी पायलट प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।

 

नई दिल्ली के रोड शो में कोयला गैसीफिकेशन की संभावनाओं और सरकार की नई नीतियों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर और सुरक्षित ऊर्जा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन केवल ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीतिक मिशन है, जो देश को आयात निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा देने में मदद करेगा। इससे उर्वरक, मेथनॉल, हाइड्रोजन, पेट्रोकेमिकल्स और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे।

2.5 लाख करोड़ का होगा निवेश, रोजगार के अवसर होंगे सृजित

उन्होंने बताया कि सरकार पहले ही 8,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना शुरू कर चुकी है। इसके अलावा हाल ही में 37,500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वित्तीय सहायता पैकेज को मंजूरी दी गई है। सरकार को उम्मीद है कि इन योजनाओं से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन से एलएनजी, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया और कोकिंग कोल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि यह पहल विशेष रूप से कोयला उत्पादक और आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगिक विकास और रोजगार को बढ़ावा देगी।

भारत औद्योगिक परि‍‍‍वर्तन के नए दौर में कर रहा प्रवेश

कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि भारत अपने प्राकृतिक संसाधनों और नवाचार क्षमता के बल पर औद्योगिक परिवर्तन के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के माध्यम से कोयले को सिंथेटिक गैस, यूरिया, मेथनॉल, अमोनिया और हाइड्रोजन जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों में बदला जा सकता है। इससे ऊर्जा, उर्वरक, इस्पात और रसायन क्षेत्र में आयात निर्भरता कम होगी।

उन्होंने बताया कि 37,500 करोड़ रुपये की योजना से देश में करीब 25 नई गैसीफिकेशन परियोजनाएं शुरू होने की संभावना है, जिससे लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव ने भारत के लिए ऊर्जा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की आवश्यकता को और महत्वपूर्ण बना दिया है। सरकार, सार्वजनिक उपक्रमों, निजी कंपनियों और निवेशकों के सहयोग से भारत को स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की दिशा में काम कर रही है।

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