वार्ता के दौरान मिनिमम गारंटीड बेनिफिट (एमजीबी) और डीए प्वाइंट वैल्यू जैसे सबसे अहम मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच लंबी और तीखी बहस हुई, लेकिन किसी भी बिंदु पर आम सहमति नहीं बन सकी।
प्रबंधन का तर्क: 4000 पुराने कर्मियों के वेतन का खर्च बना आर्थिक बोझ
बैठक के दौरान मैनेजमेंट ने ओल्ड ग्रेड के लगभग चार हजार कर्मचारियों के वेतन पर हो रहे भारी खर्च को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। प्रबंधन का तर्क है कि हर साल 3 फीसदी की दर से हो रही वेतन वृद्धि के कारण कंपनी पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ काफी बढ़ गया है।
इस वित्तीय बोझ को नियंत्रित करने के लिए मैनेजमेंट ने यूनियन के सामने एक चौंकाने वाला प्रस्ताव रखा। मैनेजमेंट ने कहा कि 3 प्रतिशत सालाना बढ़ोतरी के बाद लागू होने वाली 50 हजार रुपये की मौजूदा सैलरी सीलिंग (वेतन की अधिकतम सीमा) को घटाकर 40 हजार रुपये तक सीमित कर दिया जाए।
सहयोगी कंपनियों का हवाला देकर डीए बढ़ाने से किया इंकार
एनएस ग्रेड के कर्मचारियों को इस बार डीए प्वाइंट वैल्यू बढ़ने की बड़ी उम्मीद थी, लेकिन प्रबंधन ने इसे बढ़ाने से साफ मना कर दिया। मैनेजमेंट ने दलील दी कि टाटा समूह की अन्य अनुषंगी कंपनियों में डीए की स्थिति बहुत अलग है। उदाहरण के तौर पर:
- टाटा स्टील गम्हरिया, जेसीएपीसीपीएल, टीएसडीपीएल, टाटा बियरिंग, टीआरएफ, सीआरसी वेस्ट, वायर डिवीजन, टाटा स्टील कलर्स, टाटा मेटालिक्स, तार कंपनी और टिनप्लेट में डीए की प्वाइंट वैल्यू मात्र 2 से 2.50 रुपये के बीच है।
- ऐसे में टाटा स्टील मेन प्लांट में इसे वर्तमान स्तर से और अधिक बढ़ाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
यूनियन ने प्रबंधन के इस कड़े रुख पर तत्काल अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। यूनियन पदाधिकारियों ने सैलरी सीलिंग घटाने और डीए न बढ़ाने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे कर्मचारियों के साथ हकमारी बताया।
आज टॉप थ्री को घेरने की तैयारी
प्रबंधन और यूनियन के बीच वेतन वार्ता के बेनतीजा होने और इसमें आए गतिरोध के बीच शुक्रवार को टाटा वर्कर्स यूनियन की एक बेहद अहम कमेटी मीटिंग बुलाई गई है। इस बैठक में भारी हंगामे के आसार साफ नजर आ रहे हैं।
वेतन समझौते में हो रही लगातार देरी और प्रबंधन के अड़ियल रुख को लेकर कमेटी मेंबरों ने यूनियन के शीर्ष नेतृत्व (टॉप थ्री) को बैकफुट पर लाने की पूरी रणनीति बना ली है।
स्थिति यह है कि यूनियन के पूर्व पदाधिकारी और कद्दावर नेता आरसी झा ने नेतृत्व से सीधे सवाल-जवाब करने के लिए बैठक में पहला प्रश्न पूछने का लिखित अधिकार तक मांग लिया है।
कर्मचारियों में आक्रोश, नेताओं से मांगे जा रहे तीखे जवाब
प्रबंधन के इस ताजा रुख के बाद से आम कर्मचारियों और एनएस ग्रेड के कर्मियों में भारी नाराजगी है। कर्मचारी अब अपने ही चुने हुए नेताओं से तीखे जवाब मांग रहे हैं।
नियन अध्यक्ष संजीव चौधरी टुन्नु, महामंत्री सतीश सिंह और डिप्टी प्रेसिडेंट शैलेश सिंह की मुश्किलें इस बैठक में बढ़नी तय मानी जा रही हैं।
कमेटी मेंबरों का स्पष्ट कहना है कि पदाधिकारी केवल सदस्यों से सुझाव या सलाह मांगने की रस्म अदायगी न करें, बल्कि वे खुद मंच से यह घोषणा करें कि वेज रिवीजन वार्ता की वास्तविक और जमीनी स्थिति क्या है।
सोशल मीडिया पर गोलबंदी तेज, आरसी झा ने खोला मोर्चा
सूत्रों के अनुसार, सत्ताधारी नेताओं को घेरने के लिए विपक्ष और मुखर कमेटी मेंबरों ने व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए अपना दबाव काफी बढ़ा दिया है। लगातार संदेशों के माध्यम से सदस्यों को एकजुट किया जा रहा है।
दूसरी ओर, आरसी झा ने बाकायदा लिखित आवेदन देकर बैठक में सबसे पहले अपनी बात रखने का अधिकार मांगा है। झा काफी समय से:
- ओल्ड सीरीज के कर्मचारियों के लिए 20 प्रतिशत एमजीबी (Minimum Guaranteed Benefit) और,
- एनएस (New Series) ग्रेड के कर्मचारियों के लिए 50 प्रतिशत एमजीबी दिलाने की वकालत कर रहे हैं।
10,800 कर्मचारियों का भविष्य दांव पर
गौरतलब है कि टाटा स्टील में कर्मचारियों का पिछला सात वर्षीय ग्रेड रिवीजन समझौता 23 सितंबर 2019 को हुआ था, जो 1 जनवरी 2018 से 31 दिसंबर 2024 तक प्रभावी था। 1 जनवरी 2025 से कंपनी के लगभग 10,800 कर्मचारियों का नया वेतन समझौता लंबित है।
कई दौर की औपचारिक और अनौपचारिक बातचीत के बावजूद अब तक कोई अंतिम रास्ता नहीं निकल सका है। विशेष रूप से, पिछले 18 साल से मात्र तीन रुपये डीए प्वाइंट पर काम कर रहे एनएस ग्रेड के कर्मियों की चिंताएं प्रबंधन के इस नए रुख से और गहरी हो गई हैं।
यही कारण है कि शुक्रवार को होने वाली यह कमेटी मीटिंग वेज रिवीजन की भावी दिशा और टाटा वर्कर्स यूनियन की अंदरूनी राजनीति, दोनों के लिए बेहद निर्णायक और ऐतिहासिक साबित होने वाली है।