उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा कोष को मिलेगी मजबूती, चालान की 60% राशि होगी जमा

 प्रदेश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए वाहनों के चालान से प्राप्त होने वाली राशि का बड़ा हिस्सा अब सड़क सुरक्षा कोष में जमा किया जाएगा।

केंद्र सरकार के निर्देशों के क्रम में उत्तराखंड में ऐसी व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है।

इसके तहत पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा किए जाने वाले चालानों से प्राप्त कुल राशि का 60 प्रतिशत सड़क सुरक्षा कोष में जाएगा। इससे जिलों में सड़क सुरक्षा के कार्यों में तेजी लाई जाएगी।

प्रदेश में हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं का आंकड़ा बढ़ रहा है। इन दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण सड़क सुरक्षा के मानकों का पूरा न होना है। इनमें खराब सड़कें, तंग चौराहे, यातायात संकेतकों का न होना, पैराफिट व क्रैश बैरियर की कमी होना है। वर्तमान में सड़क सुरक्षा के कई कार्य बजट की कमी के कारण प्रभावित होते रहे हैं।

इन कार्यों को पूरा करने के लिए परिवहन विभाग को अधिकांश सरकार के भरोसे ही रहना पड़ता है। केंद्रीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में यह विषय उठा था।

इसके बाद केंद्र सरकार ने इसके लिए सभी राज्यों को वाहनों से किए जाने वाले चालान का 60 प्रतिशत सड़क सुरक्षा कोष में जमा करने की व्यवस्था करने को कहा है।

यह भी कहा गया है कि इस राशि में से 80 प्रतिशत जिलों में और 15 प्रतिशत राज्य स्तर पर सड़क सुरक्षा के कार्यों में उपयोग किया जाए। प्रदेश में बीते वित्तीय वर्ष के दौरान चालान के रूप में 100 करोड़ की राशि वसूली थी।

इस वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 120 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। यदि नई व्यवस्था लागू होती है तो सड़क सुरक्षा कोष को 70 से 75 करोड़ रुपये तक की राशि प्राप्त हो सकती है।

इससे सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सड़क सुरक्षा अभियानों, आधुनिक उपकरणों, जागरूकता कार्यक्रमों और दुर्घटना रोकथाम से जुड़े कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।

अपर परिवहन आयुक्त एसके सिंह का कहना है कि इसके लिए नियमावली में बदलाव करना है, इसके लिए शासन की अनुमति मांगी गई है।

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