गांव में ही खुलेगा बैंक और डाकघर, बिहार के पंचायत भवनों में मिलेंगी ये 5 बड़ी सुविधाएं

 राज्य सरकार गांव के लोगों को जनसुविधाएं संबंधित पंचायतों में ही उपलब्ध कराने की दिशा में लंबे समय से प्रयासरत है। इसके लिए सभी पंचायत भवनों में डाकघर, बैंक, पुस्तकालय, आरटीपीएस केंद्र और सुधा होल-डे-मिल्क पार्लर खोलने की योजना पर काम चल रहा है।

इसके लिए सभी जिलों में पंचायत सरकार भवनों का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इसे बहुउद्देशीय बनाया जा रहा है, ताकि एक ही छत के नीचे पंचायत के लोगों को सभी आवश्यक सुविधाएं मिल सके। इसमें डाकघर, बैंक, पुस्तकालय, आरटीपीएस केंद्र और सुधा होल-डे-मिल्क पार्लर भी खोला जाएगा।

मुख्य पोस्टमास्टर जनरल ने लिखा पत्र

इसी कड़ी में मुख्य पोस्टमास्टर जनरल की ओर से पंचायती राज विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर डाकघर खोलने के लिए भवनों को चिह्नित कर सूची भेजने का अनुरोध किया गया है। इसके आलोक में निदेशक ने सभी जिला पंचायती राज पदाधिकारियों को क्रियाशील पंचायत सरकार भवनों की सूची तैयार कर भेजने को कहा है, ताकि इसे डाक विभाग को भेजी जा सके।
डाकघर संचालन को लेकर किराया भी तय कर दिया गया है। इसके लिए प्रत्येक माह डाक विभाग पांच सौ रुपये किराया ग्राम पंचायत को देगा। यह राशि सीधे ग्राम पंचायत के खाते में जाएगी। निदेशक के निर्देश के आलोक में जिले में क्रियाशील पंचायत सरकार भवनों की सूची तैयार की जाने लगी है।

मुजफ्फरपुर के 114 भवनों में शुरू होगी सेवा

विदित हो कि जिले में 114 पंचायत सरकार भवनों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इसे क्रियाशील भी कर दिया गया है। अब यहां पर शीघ्र ही डाकघर की सुविधा उपलब्ध होगी। पंचायत सरकार भवन के एक कमरे में इसका संचालन होगा। जबकि अन्य में आधार सेवा केंद्र, पुस्तकालय खोले जाएंगे।
पंचायतों में डाकघर खुलने से ग्रामीणों को पार्सल करने और अन्य आवश्यक डाक सेवाओं के लिए अब दूर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। जहां-जहां निजी भवन में डाकघर का संचालन हो रहा है, वहां से इसे हटाकर पंचायत सरकार भवनों में शिफ्ट कर दिया जाएगा। इससे विभाग को आर्थिक बचत भी होगी। वर्तमान में निजी भवन में एक से दो हजार रुपये किराया देना पड़ रहा है।

बचत खाते भी खोल सकेंगे

डाकघरों के माध्यम से आम लोगों को बचत खाता, सुकन्या समृद्धि योजना, और वरिष्ठ नागरिक बचत खाता जैसी आनलाइन बैंकिंग सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा आरटीपीएस काउंटर पर जाति, आय, आवासीय और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज अब पंचायत स्तर पर ही बनाए जाएंगे।
इसके लिए प्रखंड कार्यालयों का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। गांव के लोगों का समय बचेगा। इसके साथ ही साथ लगने वाले भ्रष्टाचार के आरोपों में भी कमी आएगी। ग्रामीण स्तर पर इसकी निगरानी भी बेहतर ढंग से की जा सकेगी।

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