भारतीय खेल जगत के वरिष्ठ प्रशासक और एशियाई खेलों में भारत को पहला शूटिंग स्वर्ण पदक दिलाने वाले रणधीर सिंह का निधन हो गया है। 79 साल की उम्र में रणधीर सिंह ने अपने आवास पर आखिरी सांस ली। बताया गया है कि वह पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से भारतीय खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
Randhir Singh का हुआ निधन
दरअसल, 26 जनवरी 2026 को ओलंपिका काउंसिल ऑफ एशिया के अध्यक्ष पद से रणधीर सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। उन्हें साल 2024 में 4 साल के कार्यकाल के लिए ओसीए का अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। वह लंबे समय तक एशियाई और भारतीय खेल प्रशासन से जुड़े रहे और खेलों के विकास में उनका अहम योगदान रहा।
1978 में रचा था इतिहास
राजा रणधीर सिंह का जन्म 18 अक्टूबर 1946 को पटियाला, पंजाब के एक राजघराने परिवार में हुआ था। साल 1978 में बैंकॉक में आयोजित एशियाई खेलों में उन्होंने ट्रैप शूटिंग में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। वे एशियाई खेलों में यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने थे। इसके अलावा उन्होंने 1968 से 1984 तक लगातार पाँच ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
साल 1987 से 2014 तक वे भारतीय ओलंपिक संघ के मानद सचिव-जनरल रहे। 1991 से 2015 तक ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के सचिव-जनरल के रूप में उन्होंने एशियाई खेलों को नई ऊंचाइयां दीं। 2001 से 2014 तक वे अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के सदस्य भी रहे। वहीं, सितंबर 2024 में उन्होंने एक और इतिहास रचा जब वे OCA के अध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुने गए। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय बने। 45 एशियाई देशों ने उन पर एकमत होकर भरोसा जताया था।
खानदान से मिली थी खेलों की विरासत
रणधीर सिंह का खेलों से नाता विरासत में मिला था। उनके पिता राजा भलिंद्र सिंह 1947 से 1992 तक IOC के सदस्य रहे। उनके चाचा महाराजा यादवेंद्र सिंह ने 1951 में दिल्ली में आयोजित पहले एशियाई खेलों के आयोजन में निर्णायक भूमिका निभाई थी।


