पुलिस ने मुंशी पिंटू हत्याकांड का 26 दिन बाद राजफाश कर दिया। आरोपित ने अपने ऊपर लगे चोर का ठप्पा हटाने के लिए बेगुनाह की जान ले ली। पुलिस ने घटना में साथ देने वाले उसके साथी को भी गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस लाइन सभागार में पत्रकार वार्ता के दौरान एसपी देहात मयंक पाठक ने बताया कि मुजफ्फरनगर के गांव कुटेसरा निवासी मिंटू ने अपने भाई पिंटू की गुमशुदगी देवबंद कोतवाली में दर्ज कराई थी। पिंटू देवबंद के एक ईंट भट्ठे में मुंशी का काम करता था।
तीन मई को ग्राम आखलौर खेड़ी के पास नाले में पिंटू का शव बरामद हुआ था। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास खलौली चेकपोस्ट और गांव के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो घटना का राजफाश हुआ। जांच में मुजफ्फरनगर के ग्राम आखलौर निवासी विशाल व गगन के नाम सामने आए। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। छताछ में विशाल ने बताया कि पिछले वर्ष उसने मुजफ्फरनगर जिले की नगर कोतवाली क्षेत्र में लूट की वारदात को अंजाम दिया था, जिसमें गिरफ्तारी के बाद वह जेल गया था। कुछ दिन पहले ही वह जेल से छूटकर बाहर आया था।विशाल ने बताया कि वह और उसका साथी गगन मुकदमे की तारीख पर मुजफ्फरनगर कचहरी गए थे। लौटते समय उनकी बाइक खराब हो गई, जिसे वहीं छोड़कर दोनों घर लौट आए। घर पहुंचने पर उसके पिता ने बाइक के बारे में पूछा। बाइक छोड़ आने की बात पर पिता ने उसकी पिटाई कर दी और चोरी का आरोप लगाया। आरोपी ने पुलिस को बताया कि इसके बाद मुहल्ले के लोग भी उसे चोर कहने लगे, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हो गया। विशाल ने बताया कि उसने तय किया कि वह किसी अजनबी की हत्या करेगा, ताकि अपने ऊपर लगे चोर के ठप्पे को हटाएगा। उसने गगन को भी योजना में शामिल कर लिया।
29 अप्रैल की रात दोनों गांव के पास एक ट्यूबवेल पर बैठे थे। इसी दौरान बाइक से गुजर रहे पिंटू को उन्होंने रोक लिया। विशाल ने बताया कि दोनों ने गन्ने के खेत में ले जाकर ईंट से सिर पर कई वार किए, जिससे उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद मृतक की बाइक लेकर मुजफ्फरनगर बाईपास की तरफ गए और उसे एक होटल के पास छोड़ दिया। इसके बाद दोनों वापस घटनास्थल पहुंचे और शव को करीब 200 मीटर दूर खेतों से ले जाकर रस्सी से पत्थर बांधकर नाले में फेंक दिया। पुलिस ने दोनों आरोपितों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया। स्वजन ने सख्त कार्रवाई की मांग की है।


