बिहार में 421 स्कूलों की बढ़ी ‘टेंशन’, 29 मई तक सोशल ऑडिट कराने का आ गया आदेश

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 जिले के सरकारी स्कूलों में अब योजनाओं और व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत परखी जाएगी। समग्र शिक्षा अभियान अंतर्गत संचालित योजनाओं, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) समेत विभिन्न विद्यालयों में सोशल ऑडिट कराने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

जिले के चिन्हित 421 स्कूलों में सामाजिक अंकेक्षण कराया जाएगा। इसके लिए ग्रामीण विकास विभाग की सामाजिक अंकेक्षण सोसाइटी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

जारी निर्देश के अनुसार बेलसंड प्रखंड के 80, बाजपट्टी के 155 तथा बथनाहा प्रखंड के 186 विद्यालयों में सोशल ऑडिट किया जाएगा। यह अभियान 26 मई से शुरू होकर 29 मई तक चलेगा, जबकि दूसरे चरण में 27 जून से 29 अगस्त तक अंकेक्षण कार्य संपन्न कराया जाएगा।

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, प्रारंभिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान की ओर से सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर निर्देश दिया गया है कि सामाजिक अंकेक्षण दल को विद्यालय स्तर पर हरसंभव सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

साथ ही सभी प्रधानाध्यापकों को भी निर्धारित समय-सारणी के अनुसार अंकेक्षण कार्य सुनिश्चित कराने को कहा गया है। बताया गया है कि प्रत्येक पंचायत में पांच सदस्यीय अंकेक्षण दल छह दिनों तक स्कूलों में संचालित योजनाओं, शैक्षणिक गतिविधियों और आधारभूत सुविधाओं की जांच करेगा।

इस दौरान साफ-सफाई, शौचालय, पेयजल, बिजली व्यवस्था, खेल सामग्री, छात्र उपस्थिति, पठन-पाठन व्यवस्था एवं अन्य सुविधाओं का आकलन किया जाएगा।

सोशल ऑडिट के दौरान समग्र शिक्षा अभियान के किसी भी पदाधिकारी या कर्मी को हस्तक्षेप नहीं करने का निर्देश दिया गया है। अंकेक्षण कार्य के बाद पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जिसमें छात्र, अभिभावक, जनप्रतिनिधि, प्रधानाध्यापक एवं मीडिया कर्मी शामिल होंगे।

डीपीओ समग्र शिक्षा अभियान प्रियदर्शी सौरभ ने बताया कि जनसुनवाई की अध्यक्षता संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक करेंगे। अंकेक्षण दल प्रत्येक विद्यालय की रिपोर्ट बिंदुवार प्रस्तुत करेगा, जिस पर खुली चर्चा होगी और उपस्थित लोगों से अनुमोदन प्राप्त किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अनियमितता, शिकायत, गड़बड़ी या प्रक्रिया उल्लंघन मिलने पर जूरी सदस्यों द्वारा सुधारात्मक एवं दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा भी की जाएगी।

जानकारी के अनुसार समग्र शिक्षा कार्यक्रम वर्ष 2018 से संचालित है, जिसका उद्देश्य प्री-प्राइमरी से लेकर 12वीं तक की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, आधारभूत ढांचे में सुधार लाना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है। सोशल ऑडिट के माध्यम से अब इन योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

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