‘अभी तो ये बस ट्रेलर है’, AI के आने से भारत की व्हाइट-कॉलर नौकरियों पर खतरे की घंटी; एक्सपर्ट ने चेताया

 भारत में व्हाइट कॉलर नौकरियों पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। Marcellus Investment Managers के संस्थापक सौरभ मुखर्जी ने इसे लेकर लोगों को चेताया है। सौरभ के मुताबिक, कंपनियां उन कामों को ऑटोमेट करने की होड़ में लगी हैं, जिन्हें पहले इंसान करते थे।

एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने कहा, ‘2030 तक AI ऑटोमेशन की वजह से भारत की लगभग 18 मिलियन नौकरियों पर असर पड़ सकता है, इसकी जगह सिर्फ 3 मिलियन नई टेक नौकरियां ही पैदा होंगी।’ सौरभ ने इसके लिए US की सॉफ्टवेयर दिग्गज कंपनी ServiceNow की एक रिपोर्ट का हवाला दिया।

ServiceNow की रिपोर्ट का दिया हवाला

हालांकि गौर करने वाली बात ये है कि ServiceNow ने इन नौकरियों के लिए रिडिफाइंड या एआई द्वारा ट्रांसफॉर्म्ड शब्द का इस्तेमाल किया है, न कि पूरी तरह से खत्म होने का।

सौरभ ने टेक सेक्टर में चल रहे लेऑफ का जिक्र करते हुए कहा कि अभी तो यह बस ट्रेलर है, यह शुरुआत है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब AI सिस्टम डिजिटल कामों को लगभग इंसानी स्तर पर करने में सक्षम हो जाएंगे, तब जो होगा उसकी कल्पना करके देखिए।

एआई पर खर्च बढ़ा रही कंपनियां

उन्होंने कहा कि कोडिंग से जुड़े कई तरह के काम में एआई पहले ही 50 फीसदी तक हावी हो चुका है। अगले 2 या 3 साल में यह 90 से 100 फीसदी तक पहुंच जाएगा। सौरभ ने Microsoft, Amazon, Alphabet, Apple और Anthropic जैसी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन्होंने सिर्फ 12 महीने में AI पर अपना खर्च दोगुना कर दिया है।

सौरभ ने EY के एक सर्वे का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में मौजूद 58% ‘ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स’ एजेंटिक AI’ में निवेश कर रहे हैं, जबकि 80% से ज्यादा ‘जेनरेटिव AI’ में।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *