पैनेसिया अस्पताल में बुधवार को लगी आग के दौरान जहां एक ओर अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल था, वहीं दूसरी ओर दून पुलिस और ट्रैफिक पुलिस की सूझबूझ ने राहत एवं बचाव कार्य को बाधित नहीं होने दिया।
आग की घटना ऐसे समय हुई, जब पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी की अंतिम यात्रा भी शहर से गुजरने वाली थी। यदि दोनों व्यवस्थाएं एक ही मार्ग पर संचालित होतीं तो हालात और गंभीर हो सकते थे, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने त्वरित निर्णय लेते हुए अंतिम यात्रा का रूट बदल दिया।
जानकारी के अनुसार पहले मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी की शवयात्रा को उसी मार्ग से निकाला जाना प्रस्तावित था, जहां पैनेसिया अस्पताल स्थित है। इसी बीच अस्पताल में आग लगने की सूचना मिली और वहां रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने पुलिस अधीक्षक यातायात लोकजीत सिंह को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने को कहा, ताकि अस्पताल में राहत कार्य प्रभावित न हो और वीआईपी मूवमेंट के कारण जाम जैसी स्थिति पैदा न हो।
हरिद्वार बाईपास मार्ग से निकाला
पुलिस अधिकारियों ने तुरंत निर्णय लेते हुए अंतिम यात्रा को बलबीर रोड, छह नंबर पुलिया और जोगीवाला होते हुए हरिद्वार बाईपास मार्ग से निकाला। ट्रैफिक डायवर्जन के कारण पैनेसिया अस्पताल के आसपास का मार्ग पूरी तरह राहत एवं बचाव कार्य के लिए खाली रखा गया।
इससे फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और पुलिस टीमों को अस्पताल तक पहुंचने और मरीजों को बाहर निकालने में काफी मदद मिली। अस्पताल में धुआं भरने के कारण मरीजों और तीमारदारों में दहशत का माहौल था। कई मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालना चुनौती बन गया था।
ऐसे समय में पुलिसकर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना अस्पताल के भीतर पहुंचकर मरीजों को बाहर निकाला। किसी ने व्हीलचेयर संभाली तो किसी ने स्ट्रेचर उठाया। धुएं के बीच पुलिसकर्मी लगातार लोगों को सुरक्षित बाहर पहुंचाने में जुटे रहे।


