राम मंदिर में विराजमान रामलला को अर्पित किए जाने वाले भोग को भी अब शीघ्र ही शुद्धता का प्रमाणपत्र मिल जाएगा। मंगलवार को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय के साथ हुई बैठक में खाद्य सुरक्षा विभाग व एफएसएसएआइ के अधिकारियों ने विभिन्न मानकों व प्रक्रिया पर चर्चा की, इसके बाद ट्रस्ट की ओर से एफएसएसएआइ (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) के लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया।
बैठक में तय किया गया कि इसी माह 27 मई को आने वाली केंद्रीय टीम भोग का प्री-सेफ्टी आडिट करेगी और 28 मई को फाइनल आडिट किया जाएगा। परिसर में शिविर का आयोजन कर रसोइयों व कोठारियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा।खाद्य सुरक्षा विभाग के सहायक आयुक्त मानिकचंद्र सिंह ने बताया कि ट्रस्ट की ओर से मंगलवार को तिथि तय कर दी गई है।
इसी के साथ परीक्षण के लिए पानी का नमूना प्रयोगशाला में भेजा गया है। अब 27 मई को एफएसएसएआइ की पांच सदस्यीय केंद्रीय टीम नई दिल्ली से अयोध्या पहुंचेगी और रामजन्मभूमि परिसर स्थित सीता रसोई का विभिन्न मानकों पर परीक्षण करेगी। भोग बनाने में प्रयुक्त होने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता परखेगी और स्वच्छता व्यवस्था देखेगी।
इस दौरान फास्ट ट्रैक हाइजेनिक ट्रेनिंग भी दी जाएगी। सभी मानकों पर परीक्षण करने के बाद केंद्रीय टीम अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। सेफ्टी आडिट टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही रामलला के भोग को शुद्धता का प्रमाणपत्र यानी ‘भोग’ (ब्लिसफुल हाइजेनिक आफरिंग टू गाड) सौंपा जाएगा।
उन्होंने बताया कि रामनगरी स्थित हनुमानगढ़ी, कनक भवन, जैन मंदिर रायगंज व गुरुदारा नजरबाग को एफएसएसएआइ का भोग प्रमाणपत्र पहले ही मिल चुका है। परिसर में निर्माण कार्य जारी रहने के कारण ट्रस्ट ने अभी तक प्रमाणीकरण के लिए आवेदन नहीं किया था।


