नशे से मौतों का सिलसिला जारी है। युवा मर रहे हैं। दिल को भेद देने वाला क्रंदन गांव में सुनाई दे रहा है। वहीं, गांव में सरेआम नशे का खेल चल रहा है। पुलिस तथा स्पेशल स्टाफ पर पर अंगुली उठ रही है। यह सब हो रहा है डबवाली शहर थाना के तहत आने वाले गांव शेरगढ़ में।
सोमवार रात्रि गुरुद्वारा के सामने शैलरों को जाती कच्ची रोड पर झाड़ियों में एक युवक का शव मिला। जिसके पास इंजेक्शन, नशे में प्रयोग होने वाला मेडिकल नशा पड़ा था। मृतक की पहचान गांव शेरगढ़ निवासी 25 वर्षीय युवक के तौर पर हुई। स्वजनों ने पुलिस कार्रवाई से इनकार कर दिया।
क्योंकि गांव में नशे की खुलेआम बिक्री होने की चर्चाओं के बीच पुलिस पर अंगुली उठ रही है। मृतक के स्वजनों के अनुसार सोमवार को शाम करीब साढ़े सात बजे गोल गप्पे खाने की बात कहकर बाइक पर गया था। रात्रि नौ बजे तक वापिस नहीं लौटा तो उसकी तलाश शुरू हुई। रात्रि करीब 10 बजे उसका शव झाड़ियों में मिल गया।
स्वजनों ने बताया कि करीब एक साल पहले उन्हें पता चला था कि वह नशा करने लगा है। उसे चंडीगढ़ भेजा, दवा दिलाई। परिवार ने पूरा ख्याल रखा। जब यह तय हो गया कि वह नशा नहीं करता तो नवंबर 2025 में उसकी शादी करवा दी। क्या पता था कि वह पुनः नशा करने लग जाएगा। उसकी पत्नी गर्भवती है। मृतक के स्वजनों के अनुसार गांव में दुकान-दुकान पर नशा बिक रहा है। यहां डबवाली, सकताखेड़ा, वडिंगखेड़ा आदि के नशा करने वाले लोग नशा खरीदने आते हैं।
पुलिस कुछ नहीं करती, हमारी दुश्मनी हो जाती
स्वजनों के अनुसार युवक ने अपनी बाईं बाजू में गोलियों का चूर्ण बनाने के बाद घोलकर बनाकर इंजेक्शन लगाया था। उससे पहले उसने बाजू को रस्सी से बांधा था। इंजेक्शन के बाद दर्द असहनीय हुआ तो उसने वहीं दम तोड़ दिया। हमने पुलिस को सूचना नहीं दी। क्योंकि पुलिस कुछ नहीं करती है। बेवजह गांव में नशा बेचने वालों के साथ उनकी दुश्मनी पड़ जाती। मृतक तीन भाईयों में सबसे छोटा था।
बेटे को बचाने के लिए लोन लिया, पेंशन से भर रही हूं
इधर एक घर में मां का क्रंदन सुनाई दे रहा है। उसका छोटा बेटा नशा करता था। कुछ दिन पहले उसकी संदिग्ध मौत हो गई। पीड़िता ने बताया कि गलत संगति के कारण उसका बेटा नशा करने लगा था। उसके पति की मौत अत्याधिक शराब पीने के कारण हुई थी। अब बेटे की मौत हो गई। उन्होंने उसका नशा छुड़वाने की कोशिश की।
मैंने तो एक बैंक से 40 हजार रुपये का लोन उठाकर श्रीगंगानगर के नशा मुक्ति केंद्र से उपचार करवाया था। हर माह जो पेंशन आती है, उससे लोन की किश्त चुका रही हूं। पूरा एक साल हो गया किश्तें चुकाते हुए, आज तक कर्ज सिर से नहीं उतरा। बेटे का साया सिर से उठ चुका है। इस गांव में कोई नहीं है सुनवाई करने वाला, बच्चे नशे के कारण मर रहे हैं। उसका बेटा जब नशा करता था तो किसी की बात नहीं सुनता था। सभी के पास मदद के लिए गई थी, कोई सुनवाई नहीं हुई।
नशा करने वालों की संख्या ज्यादा, मर रहे हैं
ग्रामीणों के अनुसार गांव शेरगढ़ में नशा करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। बालकों से लेकर वृद्ध तक नशा करने में लगे हैं। चूंकि गांव में सरेआम परचून की दुकान पर नशा बिकता है। पुलिस आती है, जाती है। लेकिन नशा नहीं पकड़ती। ऐसे में नशा करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है।


