कश्मीर घाटी में शांति,स्थिरता, सुरक्षा एवं विश्वास के वातावरण की बहाली के बीच अब देश-विदेश में बसे विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं ने वापस घाटी में अपनी जड़ों को फिर से जमाने के प्रयास शुरु कर दिए हैं।
ऐसे ही एक प्रयास के तहत “निर्वासन से उत्कृष्टता तक— कश्मीरी हिंदुओं की संघर्ष, पुनर्जागरण और वापसी की यात्रा” थीम पर आधारित विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं के विभिन्न संगठनाें द्वारा छह जून से 14 जून तक ग्लोबल कश्मीरी हिंदू सम्मेलन और विरासत यात्रा का आयोजन किया जा रहा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आयोजकों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सहित विभिन्न समुदायों के गणमान्य नागरिकों को भी आमंत्रित किया है।
कश्मीरी हिंदुओं को विरासत से दोबारा जोड़ना है मकसद
डल झील किनारे स्थित शेरे कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किए जा रहा यह सम्मेलन विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं का घाटी में होने वाला अपनी तरह का पहला समागम है। इसका उद्देश्य दशकों के विस्थापन के बाद कश्मीरी हिंदुओं को उनकी पैतृक जड़ों, विरासत और सांस्कृतिक पहचान से दोबारा जोड़ना है।सम्मेलन में राउंड-टेबल चर्चाएं, बौद्धिक सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, युवाओं के साथ संवाद, विरासत संरक्षण पर चर्चा होगी । इस दौरान कश्मीर घाटी में सदियों पुरानी सनातन सभ्यता, कश्मीरी हिंदुओं की सभ्यता-सस्ंकृति से जुढे विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का विशेष रूप से तैयार किया गया हेरिटेज टूर भी शामिल होगा।
देश-विदेश से सम्मेलन में पहुंचेंगे कश्मीरी हिंदू
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गलोबल कश्मीरी पंडित डायस्पोरा (जीकेपीडी), जम्मू-कश्मीर विचार मंच, यूथ ऑल इंडिया कश्मीरी समाज, कश्मीरी पंडित एसोसिएशन मुंबई और कश्मीरी ओवरसीज एसोसिएशन यूएसए सहित सात प्रमुख सामुदायिक संगठन तथा भारत और विदेशों की 30 से अधिक संस्थाओं के सहयोग से इस कार्यक्रम का संयुक्त रूप से आयोजन किया जा रहा है। इसमें भारत, अमेरिका, यूरोप, पश्चिम एशिया और कई अन्य देशों से प्रतिनिधियों के इस कार्यक्रम में भाग लेने की उम्मीद है।
आयोजकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के अलावा नागरिक समाज के सदस्यों, विद्वानों और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों को भी व्यापक भागीदारी और संवाद के लिए आमंत्रित किया है। हालांकि, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका कि केंद्र सरकार की ओर से इस कार्यक्रम में आधिकारिक रूप से कौन शामिल होगा।


