प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने एआई उपयोग पर दी चेतावनी, कहा– रचनात्मकता मशीनों को नहीं सौंप सकते

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भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि मानवता अपनी रचनात्मकता और सोचने की क्षमता को मशीनों पर निर्भर नहीं कर सकती।

एआई इम्पैक्ट समिट से पहले दिए गए एक साक्षात्कार में सूद ने डीपफेक जैसी चुनौतियों पर चिंता जताई और कहा कि इनसे निपटने के लिए मौजूदा कानून पर्याप्त हैं। उन्होंने सख्त नए कानून बनाने की बजाय वर्तमान कानूनी ढांचे का उपयोग करने का समर्थन किया।

सूद ने कहा कि अत्यधिक कठोर कानून नवाचार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे कैलकुलेटर के बढ़ते उपयोग ने लोगों की गणना करने की क्षमता को प्रभावित किया है, वैसे ही यदि सोचने की प्रक्रिया को मशीनों को सौंप दिया गया तो यह मानवता के लिए बेहद हानिकारक होगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई इंसानों की सोच का नतीजा है, इसलिए रचनात्मकता और निर्णय क्षमता को मशीनों पर छोड़ना खतरनाक होगा। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एआई के उपयोग के लिए सुरक्षा उपायों को लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।

सूद ने कहा कि एआई का जिम्मेदारी से उपयोग करना बेहद जरूरी है क्योंकि यह भ्रम पैदा कर सकता है। यदि लोग सतर्क नहीं रहेंगे तो वे उस भ्रम को वास्तविकता मान बैठेंगे, जो समाज के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है।

हाल ही में बच्चों और महिलाओं से जुड़े अश्लील कंटेंट बनाए जाने के विवाद पर उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून ऐसे मामलों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं और इन्हें सख्ती से लागू करने की जरूरत है।

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