मुंह में आ गया ना पानी? जान लें मीरजापुर के लाल पेड़ा की अनकही कहानी ज‍िसने जायके को दी अनोखी पहचान

 विंध्याचल स्थित सिद्धपीठ मां विंध्यवासिनी मंदिर व हस्तनिर्मित कालीनों के लिए प्रसिद्ध मीरजापुर अब वैश्विक पटल पर स्वाद के लिए भी पहचाना जाएगा। योगी सरकार ने एक जिला एक व्यंजन (ओडीओसी) योजना के तहत मीरजापुर के स्वादिष्ट लाल पेड़े को शामिल किया गया है। इससे स्थानीय कारीगरों के लिए सुनहरे भविष्य के द्वार खुलेंगे।

मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए दूर-दूराज से आने वाले दर्शनार्थी मां के दर्शन के बाद शिवपुर से पेड़ा जरूर ले जाते हैं। सरकार ने इस मुहिम को गति देने के लिए विशेष सेल बनाने का निर्णय लिया है। यह सेल लाल पेड़ा कारोबार से जुड़े उद्यमियों की समस्याओं का समाधान करने के साथ ही व्यापार बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराएगी। बैंक से ऋण की सुविधाएं भी दिलाएगी। छोटे स्तर पर काम कर रहे कारीगरों को उद्यमी के रूप में विकसित किया जाएगा।

लाल पेड़े के स्वाद का कारण
शिवपुर का प्रसिद्ध पेड़ा शुद्ध दूध से धीमी आंच पर बने खोवा से बनता है। इसमें कारोबारी चीनी व छोटी ईलायची के अलावा कुछ नहीं मिलाते। शिवपुर के पेड़ा कारोबारी राहुल मोदनवाल के अनुसार पेड़ा गोल की बजाए लंबा होने के कारण आकर्षक दिखता है। धीमी आंच पर पकाने के कारण सोंधी सी महक लोगों को अपनी तरफ लुभाती है। शुद्ध खोवा में चीनी व इलायची मिलाते हैं। धीमी आंच पर लाल होने तक पकाया जाता है। खाेवा की अच्छी तरह भुनाई के बाद पेड़ा तैयार किया जाता है। इसमें चीनी नाममात्र का होने से सुगर रोगी भी खा सकते हैं। एक पेड़े की कीमत दस रुपये पड़ता है। इसे एक सप्ताह तक रखा जा सकता है। कारोबारी राजा राम ने बताया कि लाल पेड़ा मुख्यत: दूध से बनी मिठाई है। अपनी सुगंध व खाने में मुलायम होने के कारण बहुत प्रसिद्ध है। त्योहार व धार्मिक कार्यक्रम में मांग बढ़ती है।

कारीगरों का पारंपरिक हुनर 

लाल पेड़ा बनाने वाले कारीगरों के पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा। इसके लिए व्यंजनों की पैकेजिंग, गुणवत्ता, स्वच्छता के मानक व लंबी शेल्फ-लाइफ सुनिश्चित करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे लाल पेड़ा बिना खराब हुए देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच सकेंगे। लाल पेड़ा बनाने वाली 65 से अधिक इकाइयां यहां क्रियाशील हैं, जहां पर 400 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। लाल पेड़ा का चयन होने के बाद इसके कारोबार से जुड़े लोगों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खुलेंगे। -संदीप कुमार, उपायुक्त, जिला उद्योग केंद्र।

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