बिहार के सभी 38 जिलों में बनेंगे मॉनिटरिंग सेल, नए श्रम कानूनों की होगी जमीनी निगरानी; लापरवाही पर नपेंगे

 बिहार में नई श्रम संहिताओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी की व्यवस्था जिला स्तर पर होगी। इसके लिए सभी 38 जिलों में मॉनिटरिंग सेल बनाने की तैयारी हो रही है। इस संबंध में श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया जाएगा।

निर्देश के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा, 21 नवंबर 2025 के प्रभाव से लागू किये गए नए श्रम कानूनों से श्रमिकों समेत अन्य सेक्टर में कार्यरत कामगारों को लाभ हो रहा है या नहीं, इसका फीडबैक भी कार्यस्थल पर जाकर लिया जाएगा।

निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का भुगतान अनिवार्य है। श्रम कानूनों का अनुपालन नहीं करने वाले नियोक्ता (व्यक्ति, फर्म, कंपनी या संगठन) पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।

सभी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित

विभाग के सचिव दीपक आनंद ने कहा कि नई श्रम संहिताओं का लाभ श्रमिकों समेत अन्य सेक्टर में कार्यरत कामगारों को हो रहा है। विभाग का कहना है कि मज़दूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता 2020 से श्रमिकों को बेहतर वेतन, सुरक्षा और फिक्स्ड-टर्म रोजगार जैसे महत्वपूर्ण लाभ मिल रहे हैं।

वेतन संहिता के तहत सभी कर्मचारियों के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित हुई है, जबकि सामाजिक सुरक्षा संहिता के माध्यम से गिग और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को पेंशन, बीमा और मातृत्व लाभ जैसे अधिकार मिल रहे हैं।

अधिकतम 48 घंटे कार्य की सीमा तय

महिलाओं के लिए रात की शिफ्ट में सुरक्षित कार्य की व्यवस्था भी नए श्रम संहिता में सुनिश्चित की गई है। सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे कार्य की सीमा तय की गई है तथा वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत मूल वेतन के रूप में निर्धारित करना अनिवार्य किया गया है, जिससे पीएफ और ग्रेच्युटी में वृद्धि होगी।

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