हरियाणा में आवासीय, संस्थागत और वाणिज्यिक विकास की नई इबारत लिखी जाने वाली है। प्रदेश सरकार ने 71 शहरों के पुनर्गठित नियोजित विकास और नये निर्माण के लिए 1.67 लाख एकड़ जमीन खरीदने की योजना बनाई है। खास बात यह है कि इस जमीन का अधिग्रहण नहीं होगा।
यह जमीन किसानों की मर्जी से उनकी मुंहमांगी कीमत पर खरीदी जाएगी। इसके लिए भूमालिकों को हरियाणा सरकार के ई-भूमि पोर्टल पर अपनी जमीन बेचने की पेशकश करनी होगी। प्रदेश सरकार को जमीन और भू-स्वामी द्वारा पेशकश किए गए रेट पसंद आएंगे तो इसे खरीद लिया जाएगा। विभिन्न मामलों में जमीन का मोलभाव करना भी संभव हो सकेगा।
करीब 47 हजार एकड़ जमीन खरीदेगी
राज्य सरकार पहले चरण में 1.67 लाख एकड़ जमीन खरीदने के बाद दूसरे चरण में 17 शहरों के विकास के लिए करीब 47 हजार एकड़ जमीन खरीदेगी। पहले चरण की जमीन खरीदने के लिए जमीन विक्रेता किसानों व भूमालिकों से 30 जून तक ई-भूमि पोर्टल (http://ebhoomi.jamabandi.nic.in) पर आवेदन मांगे गए हैं।
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम, शहरी स्थानीय निकाय और परिवहन विभाग मिलकर राज्य के बुनियादी विकास के लिए भूमि की मांग को पूरा करने में जुटे हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने साल 2026-27 के बजट में 69 शहरों में 849 आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक सेक्टर विकसित करने की घोषणा की थी। प्रदेश सरकार की योजना है कि हरियाणा को उत्तर भारत के औद्योगिक विनिर्माण आधार, लाजिस्टिक्स हब और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए सेटेलाइट शहरीकरण क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए, जिसके लिए इतनी जमीन की जरूरत है।
भू-स्वामियों से जमीन बेचने की पेशकश मांगी
राज्य सरकार ने कानूनी विवादों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए ई-भूमि पोर्टल पर भू-स्वामियों से जमीन बेचने की पेशकश मांगी है। पहले जमीन का अधिग्रहण करने की स्थिति में विवाद खड़े हो जाते थे, जो कई-कई सालों तक चलते रहते थे।
हरियाणा के शहरी निकाय और राजस्व व आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल के अनुसार ई-भूम पोर्टल भूस्वामियों को स्वेच्छा से जमीन बेचने के लिए पंजीकरण करने और नियोजित विकास में साझीदार बनने की अनुमति प्रदान करता है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि कानूनी विवाद भी पैदा नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में नये सेक्टर विकसित किए जाने हैं, जो नियोजित शहरी विस्तार की एक अनवरत प्रक्रिया है।
इसके अलावा, औद्योगिक सेक्टर भी विकसित होने हैं। परिवहन गलियारा व लाजिस्टिक हब तैयार किया जाना है। जमीन की खरीद के बाद होने वाले विकास से अनियमित और अवैध कालोनियों के पैदा होने पर रोक लगेगी तथा नये सेक्टरों में लोगों को सरकार की ओर से मूलभूत जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
एचएसवीपी करेगा सबसे अधिक जमीन की खरीद
हरियाणा में सबसे अधिक भूमि की मांग एचएसवीपी द्वारा की जा रही है। अकेले गुरुग्राम में लगभग 36 गांवों में फैली 17 हजार 358 एकड़ भूमि नये शहरी क्षेत्रों के लिए खरीदी जानी है। अंबाला क्षेत्र में 6,600 एकड़ जमीन की खरीद लाजिस्टिक्स और संस्थागत केंद्रों को विकसित करने के लिए होगी।
पंचकूला जिले में 3,914 एकड़, फरीदाबाद जिले में 4,500 एकड़, जींद में 2,172 एकड़, होडल में 1,729 एकड़, हांसी में 1,495 एकड़ जमीन की खरीद होगी। इनके अलावा, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत जिलों के लिए भी जमीन की खरीद प्रस्तावित है।
नई आइएमटी, परिवहन गलियारा और शहरों का नियोजित विकास
हरियाणा में बनने वाली 10 आइएमटी के लिए करीब 30 से 35 हजार एकड़ भूमि की आवश्यकता का अनुमान है। एचएसआइआइडीसी का पूरा ध्यान औद्योगिक माडल टाउनशिप (आइएमटी) विकसित करने पर है। आइएमटी खरखौदा (सोनीपत) का 3,217 एकड़ में फैला क्षेत्र आटोमोबाइल और विनिर्माण हब के रूप में उभर रहा है।
आइएमटी मानेसर और बावल का क्षेत्र आटो, इलेक्ट्रानिक्स और लाजिस्टिक्स के लिए विस्तार मांग रहा है। आइएमटी नारायणगढ़ (अंबाला) में लगभग 450 एकड़ भूमि औद्योगिक गतिविधियों के लिए चिन्हित की गई है। इसके पंजीकरण की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
लैंड पूलिंग मॉडल अपना रहा शहरी निकाय विभाग टियर-2 शहर
शहरी निकाय विभाग टियर-2 शहरों के लिए लैंड पूलिंग माडल अपना रहा है, जिसे करनाल, हिसार, रोहतक और यमुनानगर जैसे शहरों में लागू किया जाना है। भूमि की आवश्यकता का एक बड़ा हिस्सा परिवहन परियोजनाओं से जुड़ा है, जिसमें कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे के साथ लाजिस्टिक्स कारिडोर का विकास शामिल है।
दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कारिडोर के साथ एकीकरण तथा अंबाला में लगभग 13 एकड़ में वाहन परीक्षण और चालक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना भी इसी परियोजना का हिस्सा हैं।


