आज 1 मई है और यह दिन ‘लेबर डे’ (Labor Day) के तौर पर दुनियाभर के मेहनतकश मजदूरों को समर्पित है। श्रमिक दिवस कहें चाहे मजदूर दिवस, इस दिन को मजदूरों के अधिकारों, संघर्ष और उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है। ‘इंटरनेशनल लेबर डे’ की शुरुआत 1 मई 1886 को अमेरिका में काम के घंटे 8 घंटे तय करने के लिए की गई हड़ताल और उसके बाद हुई हिंसा में शहीद हुए लोगों की याद में की गई। इस आंदोलन के बाद ही वैश्विक स्तर पर कामकाजी वर्ग के लिए 8 घंटे का नियम तय हुआ। यह तो हुई श्रमिक दिवस के इतिहास की बात, अब बात करते हैं वर्तमान की और मजदूरों के अधिकारों की। आजादी के बाद से भारत में कई श्रम सुधार हुए और विभिन्न सरकारों ने श्रमिकों की दशा व वेतन में सुधार के लिए कई नियम-कानून बनाए, जिसमें 4 लेबर कोड (4 Labor Code) का प्रभावी होना सबसे अहम है।
हाल ही में दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक नगर नोएडा (Noida Labor Protest) में हजारों श्रमिक वेतन में बढ़ोतरी को लेकर सड़कों पर उतर गए थे। इसके बाद सरकार ने मजदूरों की मांगों को मानते हुए श्रमिकों के लिए अंतरिम न्यूनतम (Labor Minimum Wages) मजदूरी में लगभग 21% की वृद्धि कर दी। क्या आप जानते हैं भारत में श्रमिकों को कितना वेतन या मजदूरों को न्यूनतम दिहाड़ी को लेकर क्या प्रावधान हैं। वेतन के अलावा, उन्हें और कौन-कौन सी सुविधाएं दी जाती हैं। किस राज्य में श्रमिकों को सबसे ज्यादा वेतन या दिहाड़ी मिलती है? आइये हम आपको बताते हैं इस संबंध में हर जरूरी जानकारी…
कहां ज्यादा, कहां कम श्रमिकों का वेतन?
भारत में औसत मासिक वेतन/नियमित कर्मचारियों की सैलरी के मामले में मिजोरम, वह राज्य है जो सबसे ज्यादा 37169 रुपये की गारंटी देता है। इसके बाद, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, गोवा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हरियाणा, कर्नाटक और केरल ऐसे राज्य हैं जो 31090 रुपये से 25443 रुपये का औसत मासिक वेतन देते हैं।
वहीं, श्रमिकों को सबसे कम मासिक वेतन देने के मामले में यूपी, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और पंजाब आते हैं, जहां मजदूरों का औसत मासिक वेतन 18426 रुपये से 16467 रुपये है।
इन राज्यों में न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन
- उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे प्रमुख राज्यों ने 1 अप्रैल, 2026 से न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन किया है, जिससे विभिन्न कौशल स्तरों के लाखों श्रमिक प्रभावित हुए हैं। हरियाणा ने कौशल श्रेणियों के आधार पर न्यूनतम मजदूरी के नए स्तर जारी किए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश ने अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल श्रमिक समूहों में अंतरिम मजदूरी में लगभग 21% की वृद्धि की है।
- संशोधित वेतन संरचना के तहत, हरियाणा में अकुशल श्रमिकों को न्यूनतम 15,220.71 रुपये प्रति माह का वेतन मिलेगा। अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 16,780.74 रुपये प्रति माह निर्धारित किया गया है। कुशल श्रमिकों को कम से कम 18,500.81 रुपये प्रति माह मिलेंगे।
- उत्तर प्रदेश में अंतरिम न्यूनतम मजदूरी में संशोधन किया गया है, जिससे गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद जिलों के श्रमिकों की मजदूरी में 21% तक की वृद्धि हुई है। इन दोनों जिलों में अकुशल श्रमिकों की मजदूरी 11,313 रुपये से बढ़कर 13,690 रुपये हो गई है, जो 21.01% की वृद्धि दर्शाती है।
- इसी प्रकार, अर्ध-कुशल श्रमिकों की मजदूरी 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये हो जाएगी, जो 21% की वृद्धि है। कुशल श्रमिकों के लिए संशोधित मजदूरी 13,940 रुपये से बढ़कर 16,868 रुपये हो गई है, जो 21% की वृद्धि दर्शाती है।
- एक अधिसूचना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अकुशल श्रमिकों को न्यूनतम 11,313.65 रुपये प्रति माह या 435.14 रुपये प्रति दिन की मजदूरी प्राप्त करने का अधिकार है। इसी प्रकार, अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मासिक मजदूरी 12,446 रुपये और प्रति दिन की मजदूरी 478.69 रुपये निर्धारित की गई है। कुशल श्रमिकों के लिए वर्तमान न्यूनतम मासिक मजदूरी 13,940.37 रुपये और प्रति दिन की मजदूरी 536.16 रुपये है।
लेबर कोड और मजदूरों के अधिकार
भारत सरकार ने पिछले साल नवंबर में 4 नए लेबर कोड लागू करने का एलान किया था। इसमें भारत के कार्यबल के लिए बेहतर वेतन, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर कल्याण जैसी बातें शामिल हैं। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:
- सभी कर्मचारियों के लिए नियुक्ति पत्र अनिवार्य है। क्योंकि, लिखित प्रमाण से पारदर्शिता, नौकरी की सुरक्षा और स्थायी रोजगार सुनिश्चित होगा।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स सहित सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवरेज प्राप्त होगी।
- सभी श्रमिकों को पेंशन, ईएसआईसी, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलेंगे।
- वेतन संहिता, 2019 के तहत, सभी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन भुगतान का वैधानिक अधिकार प्राप्त है।
- न्यूनतम वेतन और समय पर भुगतान से आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- नियोक्ताओं को 40 वर्ष से अधिक आयु के सभी कर्मचारियों को निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच प्रदान करना अनिवार्य है।
- नियोक्ताओं के लिए समय पर वेतन देना अनिवार्य है, जिससे वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित होती है, कार्य तनाव कम होता है और श्रमिकों का समग्र मनोबल बढ़ता है।
- महिलाओं को उनकी सहमति और आवश्यक सुरक्षा उपायों के अधीन, सभी प्रतिष्ठानों में रात्रिकालीन और सभी प्रकार के कार्यों में काम करने की अनुमति है।
- महिलाओं को उच्च आय अर्जित करने के समान अवसर मिलेंगे – उच्च वेतन वाली नौकरियों में।
इन प्रमुख कल्याणकारी उपायों के अलावा, लेबर कोड में कई और सुधार भी हुए हैं जो श्रमिक सुरक्षा को मजबूत करते हैं और नियोक्ताओं के लिए अनुपालन को सरल बनाते हैं। इनमें सबसे अहम है राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी श्रमिक को न्यूनतम जीवन स्तर से कम वेतन न मिले।


