इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विभाग द्वारा निर्धारित गलत वेतन पुनर्निर्धारित कर दारोगा के सेवानिवृत्ति परिलाभों व पेंशन से कटौती करने संबंधी एसएसपी मुरादाबाद के आदेश पर रोक लगा दी है और सेवाकाल में पुराने वेतनमान के आधार पर पेंशन तथा अन्य सेवा जनित परिलाभ का भुगतान करने का निर्देश दिया है।
साथ ही राज्य सरकार से याचिका पर जवाब मांगा है।यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने राजेश कुमार शुक्ल की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याची की तरफ से अधिवक्ता इरफान अहमद मलिक ने बहस की।
इनका कहना था कि याची 1984 में पुलिस कांस्टेबल नियुक्त हुआ, इसके बाद हेड कांस्टेबल व पुलिस उप निरीक्षक पद पर पदोन्नति दी गई। वह दो नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त हुआ।
उसे अंतिम वेतन 66 हजार रुपये मिले थे लेकिन पेंशन व अन्य परिलाभ का भुगतान 62,200 रुपये वेतन पर किया जा रहा है, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लघंन है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लंबे अंतराल के बाद सेवानिवृत्त कर्मी के परिलाभों से विभाग की गलती से अधिक वेतन में कटौती कर पेंशन आदि का निर्धारण नहीं किया जा सकता। इसलिए एसएसपी का वेतन में कटौती आदेश रद किया जाए। ऐसे ही एक मामले में हाई कोर्ट ने कटौती आदेश पर रोक लगा रखी है। कोर्ट ने दोनों याचिकाओं की एक साथ सुनवाई का आदेश दिया है।


