फल्गु नदी पर निर्माणाधीन मंडई वीयर परियोजना की लागत में शुरुआती आकलन की तुलना में लगभग 82 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है। अब यह परियोजना 424.21 करोड़ से पूरी होगी। शुरुआती लागत 232.83 करोड़ रुपये अनुमानित थी।
भूमि अधिग्रहण और दूसरे अड़चनों के कारण काम में विलंब हुआ और लागत बढ़ गई। प्राक्कलन का तीसरी बार पुनरीक्षण हुआ है, जिसे राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को अपनी स्वीकृति दे दी।
इस परियोजना के जरिये जहानाबाद, पटना, गया और नालंदा जिला के किसानोंं को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होना है। इससे न केवल फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि किसानों की आय में भी सुधार होगा। इस वर्ष मई-जून तक परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य है।
वर्ष 2007 में इस परियोजना की परिकल्पना हुई थी। पहला प्राक्कलन तभी बना था। परियोजना में मुख्य बाधा भूमि अधिग्रहण को लेकर थी। भू-स्वामी नई दर से मुआवजा की मांग कर रहे थे। कुल 722 किसानों से भूमि ली गई थी, जिसका मुआवजा 56 करोड़ रुपये निर्धारित हुआ।
जल संसाधन विभाग के अनुसार, अब तक 34.28 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। बंदुगंज, परियावां, और मइयावां आदि गांवों में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। दूसरी अड़चनें भी दूर कर ली गई हैं और अब एक-दो माह में काम पूरा हो जाएगा।
मंडई वीयर 365 मीटर लंबी कंक्रीट की संरचना है, जिसमें 1.20 मीटर ऊंचे आटोमैटिक शटर लगाए गए हैं, जो लगभग 61 मीटर का पोंड लेवल सुनिश्चित करते हैं।वीयर के साथ उससे निकलने वाली दायां अैर बायां मुख्य नहर प्रणाली और संरचनाओं का निर्माण हो रहा है।
बहरहाल परियोजना का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसे खरीफ सीजन तक पूरी तरह से चालू करने का लक्ष्य है। पिछले दिनों हुई समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने निर्माण स्थल पर मानव बल और मशीनरी (एक्सावेटर, टिप्पर) बढ़ाने को भी कहा था, ताकि परियोजना अविलंब पूरी हो सके।
अब जबकि बढ़ी हुई लागत राशि के व्यय की स्वीकृति मिल गई है, तो आस बंधती है कि उपरोक्त चार जिलों के किसान इस परियोजना से इस बार धान-मक्का की सिंचाई कर सकेंगे।


