भारतीय फोटोग्राफी के दिग्गज रघु राय का कैंसर के चलते रविवार को निधन हो गया।
1970 और 1980 के दशक में उन्होंने अपने कैमरे में ताजमहल को सिर्फ एक स्मारक नहीं, बल्कि जीवंत भावनाओं और मानवीय कहानियों के रूप में कैद किया।
उनकी किताब ‘ताज महल’ में ताज की अनगिनत छवियों का संग्रह है, जो स्थापत्य कला, मौसम, लोगों और समय की यात्रा को दर्शाती हैं।
उन्होंने ताजमहल को केवल संगमरमर की इमारत नहीं माना, बल्कि मुगल काल की शान, प्रेम की कहानी और भारत की वास्तविकता से जोड़ा। उनके द्वारा ली गईं ताजमहल के एरियल व्यू, गुंबद, संरक्षण की तस्वीरें बेमिसाल हैं। उनकी तस्वीरें बोलती थीं और नई कहानी सुनाती थीं।
वह वर्ष 2013 में हुए ताज लिटरेचर फेस्टिवल में भाग लेने आगरा आए थे। रघु राय, फोटोग्राफी को देश का दर्शन मानते थे। उन्होंने ताजमहल के हर रंग को तस्वीरों में कैद किया। शाहजहां और मुमताज की प्रेम कहानी को उन्होंने अपनी तस्वीरों से जीवंत बनाया।
उनकी तस्वीरें हमें याद दिलाती हैं कि ताजमहल केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और मानवीय भावनाओं का संगम है। रघु राय फरवरी, 2013 में डीपीएस, शास्त्रीपुरम में हुए ताज लिटरेचर फेस्टिवल में आए थे।
ताज लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले उद्यमी हरविजय सिंह बाहिया ने बताया कि रघु राय की फोटोग्राफी लाजबाव थी। यह सभी जानते हैं देश में उनसे अच्छा फोटोग्राफर नहीं हृुआ। वह सबसे अच्छे फोटोग्राफर थे।
ताज लिटरेचर फेस्टिवल के पहले संस्करण में वह आगरा आए थे। उन्होंने फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के साथ ही दो सत्रों में भी भाग लिया था। ब्लैक एंड व्हाइट फोटोग्राफी में भी उन्होंने जबरदस्त काम किया। उनकी हर तस्वीर बोलती थी और नई कहानी बताती थी।
फोटोग्राफी के उनके एंगल और दृष्टिकोण का फोटोग्राफर अनुसरण करना चाहते हैं, लेकिन यह आसान नहीं है। उनकी हर तस्वीर बोलती थी और नई कहानी सुनाती थी। उनकी कला में जादू था। यह दु:ख की बात है कि 83 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।
पिछले वर्ष अक्टूबर में काॅफी टेबल बुक ‘लार्ड्स ऑफ गिर’ के विमोचन में उनके आने की उम्मीद थी, लेकिन तबियत ठीक नहीं होने से वह नहीं आ सके थे।
प्रोफेशनल फोटोग्राफी करने वाले अर्पण भार्गव ने बताया कि ताज लिटरेचर फेस्टिवल में फोटो प्रदर्शनी के उद्घाटन में रघु राय ने युवाओं को फोटोग्राफी के लिए काफी उपयोगी टिप्स दिए थे। उन्होंने बताया था कि फोटोग्राफी में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
ब्लैक एंड व्हाहट फोटोग्राफी के बारे में जानकारी दी थी। वह डाउन टू अर्थ इंसान थे। छोटों से भी काफी अच्छी तरह से मिले थे। उन्हें इस बात का मलाल है कि वह सेशन में शामिल नहीं हो सके थे।
भगवान को भी देखूंगा तो कैमरे से देखूंगा
ताज लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजकों में शामिल अतुल जैन ने बताया कि रघु राय का आगरा से काफी लगाव था। वर्षाें ताजमहल की फोटोग्राफी के लिए वह यहां आए थे। फोटोग्राफी का उनका ज्ञान अद्भुत था। फोटोग्राफी प्रदर्शनी में उन्होंने उनसे पूछा था कि कैसा लगा?
उन्होंने कहा था कि उन्हें हर चीज अपने कैमरे से देखने पर अच्छी लगती है। मैं भगवान को भी देखूंगा तो कैमरे से देखूंगा। कैमरे से उन्हें बहुत प्यार था।
आजम खां को ताजमहल में बांधकर रखना चाहिए
वर्ष 2013 में प्रदेश में सपा सरकार थी। तत्कालीन मंत्री आजम खां ने बयान दिया था कि ताजमहल को जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी खजाने का दुरुपयोग कर बनाया गया है।
ताज लिटरेचर फेस्टिवल में आए रघु राय ने इस पर कहा था कि आजम खां को ताजमहल में बांधकर रखना चाहिए और उन्हें ताज की खूबसूरती और वास्तुकला दिखानी चाहिए। तब वह अपने बयान पर शर्मिंदा होंगे।


