जनपद पौड़ी में चारों ओर जंगल आग की चपेट में हैं। लेकिन वन विभाग के अनुसार जिले में फायर सीजन शुरू होने से अब तक केवल 26 घटनाएं ही हुई हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वन विभाग पर आगजनी की घटनाओं को छुपाने का आरोप लगाया है।
वन विभाग के आंकड़ों में अभी तक जंगलों में आग की केवल 26 घटनाएं हुई हैं। जिनमें गढ़वाल वन प्रभाग क्षेत्र में सात, सिविल एवं सोयम वन प्रभाग पौड़ी में 17 और लैंसडौन वन प्रभाग में केवल दो घटनाएं दर्शाई गई हैं।
वन विभाग छुपा रहा घटनाएं!
वहीं भूमि संरक्षण वन प्रभाग लैंसडौन, राजाजी टाईगर रिजर्व, कालागढ़ प्रभाग में आग की घटनाएं शून्य बताई गई हैं। सामाजिक कार्यकर्ता जगमोहन डांगी व पौड़ी बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक नमन चंदोला ने बताया कि जनपद पौड़ी गढ़वाल में चारों ओर जंगल आग से धधक रहे हैं। लेकिन वन विभाग आंकड़ों में घटनाएं छुपा रहा है।
उन्होंने कहा कि वन विभाग के ही फारेस्ट फायर अलर्ट पर आनलाइन आंकड़ों को देखा जाय, तो एक से 28 अप्रैल तक गढ़वाल वन प्रभाग में 80, लैंसडौन वन प्रभाग में 33 व कालागढ़ प्रभाग में आग री 11 घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि विभाग वनाग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं।
जिला अस्पताल पौड़ी की नेत्ररोग विशेषज्ञ डा. गीतांजलि पाल ने बताया कि जंगलों की आग से आंखों में जलन, चुभन, सूखेपन के प्रतिदिन चार से पांच मरीज आ रहे हैं। वनाग्नि नियंत्रित न होने पर यह परेशानी बढ़ सकती है। वहीं अस्पताल के फिजिशयन डा. आनंद खंकरियाल ने बताया कि जंगलों की आग सांस के मरीजों की परेशानियां बढ़ा रहा है। ओपीडी में प्रतिदिन 10 से 15 मरीज आ रहे हैं।
जंगलों में आगजनी की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग क्रू स्टेशनों के माध्यम से निगरानी कर रहा है। वन कर्मी तत्परता के साथ जंगलों की आग बुझा रहे हैं। जनपद में हुई घटनाओं को किसी भी स्तर पर सीमित नहीं दर्शाया जा रहा है। प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। – महातिम यादव, उप वन संरक्षक गढ़वाल व नोडल अधिकारी वन विभाग


