लद्दाख के लेह जिले में बुधवार को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के आगमन के साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन की नई शुरुआत होगी। इन अवशेषों को बुधवार सुबह भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से दिल्ली से लेह लाया जा रहा है।
इनमें 1898 में उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर के पिपरहवा में मिले छठी शताब्दी ईंसा पूर्व की मूर्तियां और पांडुलिपियां शामिल हैं। ये अवशेष पहली बार दो से 14 मई तक लद्दाख में प्रदर्शित किए जाएंगे। सुरक्षा के लिए लद्दाख पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है, और इन्हें शीशे के बुलेट प्रूफ बाक्स में रखा जाएगा।
जिससे क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। सुबह 10 बजे लद्दाख के बौद्ध धर्म गुरु और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी इन पवित्र अवशेषों का स्वागत करेंगे। इसके बाद इन्हें धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बीच जेवेत्सल ले जाया जाएगा। ट्रैफिक प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है, और उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने सुरक्षा और जन सुविधाओं की समीक्षा की है।
पूरी तरह सजा लेह जिला
भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के स्वागत हेतु लद्दाख का लेह जिला पूरी तरह सज गया है। लेह शहर में चल रहे व्यापक सौंदर्यीकरण अभियान के तहत स्थानीय कारीगरों से एक हजार से अधिक गमलों में फूल लगाए गए हैं।
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंगलवार को लेह का दौरा किया और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लेह एयरपोर्ट से जेवेत्सल तक के मार्ग का निरीक्षण किया। विशेष कार्यक्रम एक मई को आयोजित होगा, जबकि पवित्र अवशेषों का सार्वजनिक प्रदर्शन दो मई से 14 मई तक होगा।
उपराज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शहर को सजाने में कोई कमी न छोड़ी जाए। गमलों में पेटूनिया, सालविया, गेंदा, चंपा, देवदार, साइप्रस, ब्लू पाइन और पाम जैसे विभिन्न पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ, हरित और सुंदर वातावरण तैयार करना आवश्यक है ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को एक यादगार अनुभव मिल सके।
यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि लद्दाख की संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और मेहमाननवाजी को भी दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर है। प्रशासन ने सड़क किनारे पेड़-पौधे लगाने के साथ-साथ कई बुनियादी सुधार कार्य भी किए हैं।


