सरकारी स्कूलों में अधिक से अधिक बच्चों के दाखिले कराने के अभियान को गहरा धक्का लगा है। राज्य के 1338 स्कूल ऐसे चिह्नित किए हैं, जिनकी बालवाटिकाओं (नर्सरी) में एक भी बच्चे का दाखिला नहीं हो पाया है।
बाल वाटिका बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा का आधार प्रदान करती है, जिससे वे भविष्य में औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार हो सकें। बाल वाटिका कार्यक्रम बच्चों के संपूर्ण विकास पर जोर देता है, जिसमें शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास शामिल है।
इन स्कूलों में बच्चों के दाखिले नहीं होने पर शिक्षा विभाग के अधिकारी चिंतित हैं। शिक्षा विभाग के महानिदेशक की ओर से स्कूलों के बच्चों के नहीं पहुंचने के कारणों पर आधारित एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है, ताकि उसके आधार पर भविष्य की चुनौतियों से निपटा जा सके।
महानिदेशक खुद करेंगे दौरा
महानिदेशक इस रिपोर्ट के मिलते ही स्वयं भी उन स्कूलों का दौरा करने निकलेंगे, जहां बच्चों के दाखिले नहीं हो रहे हैं। बच्चों के दाखिलों के अभाव में शिक्षा विभाग द्वारा आरंभ किया गया प्रवेश उत्सव भी महत्वहीन बन गया है। राज्य में यमुनानगर और अंबाला जिलों में सबसे अधिक ऐसे स्कूल हैं, जिनकी बालवाटिकाओं में कोई दाखिला नहीं हुआ है।
बच्चों को स्कूलों तक लेकर आने की जिम्मेदारी शिक्षकों को सौंपी गई थी। ग्राम पंचायतों, स्कूल प्रबंधन समितियों और शहरी निकाय प्रतिनिधियों का भी इस कार्य में सहयोग मांगा गया था। इसके बावजूद 1338 स्कूलों की बाल वाटिकाएं बिना बच्चों के हैं।
शिक्षा महानिदेशक ने जो रिपोर्ट तैयार कराई है, उसमें इस बात का विशेष उल्लेख करने को कहा गया है कि झुग्गी-झोपड़ियों के साथ श्रमिक वर्ग के बच्चों के स्कूल आने की क्या स्थिति है।
यमुनानगर जिले के 179 स्कूल ऐसे हैं, जिनकी बाल वाटिकाओं में कोई बच्चा दाखिले के नहीं पहुंच पाया है। अंबाला जिले के 117 स्कूलों में बच्चे नहीं पहुंचे हैं, जबकि कुरुक्षेत्र और महेंद्रगढ़ जिलों के 96-96 स्कूल ऐसे हैं, जहां की बालवाटिकाओं को बच्चों का इंतजार है।
| जिला | स्कूल | जिला | स्कूल |
| अंबाला | 117 | कुरुक्षेत्र | 96 |
| भिवानी | 90 | महेंद्रगढ़ | 96 |
| चरखी दादरी | 42 | नूह (मेवात) | 34 |
| फरीदाबाद | 50 | पलवल | 57 |
| फतेहाबाद | 19 | पंचकुला | 95 |
| गुरुग्राम | 70 | पानीपत | 19 |
| हिसार | 72 | रेवाड़ी | 89 |
| झज्जर | 30 | रोहतक | 14 |
| जींद | 31 | सिरसा | 56 |
| कैथल | 17 | सोनीपत | 01 |
| करनाल | 64 | यमुनानगर | 179 |
| कुल योग | 1338 |
सोनीपत एकमात्र ऐसा जिला हैं, जहां पर मात्र एक स्कूल में नामांकन नहीं हुआ है। कैथल में 17, पानीपत व फतेहाबाद में 19-19, रोहतक में 14 स्कूलों में नामांकन शून्य रहा है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के मुकाबले वर्ष 2026-27 में कम दाखिले होने पर स्कूल मुखियाओं को जिम्मेदार ठहराए जाने वाला है।
शिक्षा महानिदेशक की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, प्राथमिक जिला शिक्षा अधिकारियों व ब्लाक शिक्षा अधिकारियों से कहा गया है कि वे ग्राउंड पर जाकर वास्तविक स्थिति की जानकारी लें और रिपोर्ट मुख्यालय भेजें।
निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में स्वच्छ पानी, शौचालयों की साफ-सफाई और मिड-डे-मील की सही व्यवस्था जांचने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही विद्यालयों में इलेक्ट्रोनिक संसाधनों, जिनमें स्मार्ट बोर्ड वर्किंग हालत में है या नहीं, इसकी भी जांच करनी होगी।


