पांच साल के नतीजों का रिपोर्ट, छात्राओं ने लगातार बनाए रखा ‘दबदबा’

इंटरमीडिएट परीक्षा के पिछले पांच वर्षों के परिणामों का विश्लेषण शिक्षा व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण रुझानों को उजागर करता है। इस अवधि में कुल उत्तीर्ण प्रतिशत में उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन एक बात लगातार स्पष्ट रही कि छात्राओं ने हर वर्ष छात्रों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया और अपनी बढ़त बनाए रखी।

सम्मान सहित (75 प्रतिशत या इससे अधिक अंक) उत्तीर्ण होने का सर्वाधिक प्रतिशत 2024 में था, जबकि 10.79 प्रतिशत छात्र-छात्राएं सम्मान के साथ पास हुए थे। वहीं, पिछले पांच वर्ष में सर्वाधिक 41.50 प्रतिशत छात्र 2026 में प्रथम श्रेणी में पास हुए।वर्ष 2022 में कुल पास प्रतिशत 85.33 रहा, जिसमें छात्राओं का उत्तीर्ण प्रतिशत 90.15 और छात्रों का 81.21 प्रतिशत था।

इसके बाद 2023 में परिणामों में गिरावट आई और कुल पास प्रतिशत घटकर 75.52 रह गया। इस गिरावट का असर दोनों वर्गों पर पड़ा, लेकिन फिर भी छात्राओं ने 83 प्रतिशत के साथ छात्रों (69.34 प्रतिशत) से बेहतर प्रदर्शन किया। वर्ष 2024 में परिणामों में सुधार देखने को मिला और कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 82.60 पहुंच गया। छात्राओं का प्रदर्शन 88.42 प्रतिशत रहा, जबकि छात्रों का 77.78 प्रतिशत।

इसके बाद 2023 में परिणामों में गिरावट आई और कुल पास प्रतिशत घटकर 75.52 रह गया। इस गिरावट का असर दोनों वर्गों पर पड़ा, लेकिन फिर भी छात्राओं ने 83 प्रतिशत के साथ छात्रों (69.34 प्रतिशत) से बेहतर प्रदर्शन किया। वर्ष 2024 में परिणामों में सुधार देखने को मिला और कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 82.60 पहुंच गया। छात्राओं का प्रदर्शन 88.42 प्रतिशत रहा, जबकि छात्रों का 77.78 प्रतिशत।

ससम्मान उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों की संख्या हुई कमइंटर में सम्मान सहित उत्तीर्ण होने वाले छात्रों की संख्या में गिरावट आई है। 2026 में यह आंकड़ा 1,58,789 है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 1,62,128 थी। 2024 में 2,18,682, 2023 में 1,60,135 और 2022 में संख्या 1,05,387 थी।

हालांकि प्रतिशत में सम्मान सहित उत्तीर्ण होने वाले छात्रों की संख्या मामूली बढ़ी है। जहां 2025 में यह 7.69 प्रतिशत था, वहीं 2026 में यह 7.95 प्रतिशत है। प्रथम श्रेणी में पास होने वाले छात्रों की संख्या 2022 में 7,92,070 थी, 2023 में 7,02,295, 2024 में 7,90,254, 2025 में 8,73,994 और 2026 में यह घटकर 8,29,281 रह गई। द्वितीय और तृतीय श्रेणी में पास होने वाले छात्रों की संख्या में भी कमी आई है।

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