पटना यूनिवर्सिटी का प्रशासनिक काम होगा पेपरलेस, नए भवन में जून से शुरू होगा डिजिटल सिस्टम

 पटना विश्वविद्यालय में प्रशासनिक सभी काम को पेपर लेस करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए विश्वविद्यालय स्तर पर तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि सरकार स्तर पर अभी नए भवन को विश्वविद्यालय को हैंडओवर नहीं किया गया है। इसमें फर्नीचर से संबंधित कुछ होना बांकी है।

मान कर चला जा रहा है कि विभागीय स्तर पर नए भवन को जून के अंतिम सप्ताह तक विश्वविद्यालय को हैंडओवर कर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय ने नए प्रशासनिक भवन में शिफ्ट होने से पहले सभी तरह के कामों को पेपर लेस करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

नए प्रशासनिक भवन में हर फ्लोर पर कंप्यूटर की व्यवस्था होगी। भवन में इंट्रानेट (निजी और सुरक्षित कंप्यूटर नेटवर्क ) लगाया जाएगा। इससे भवन में एक जगह से दूसरे जगह पर काम करने में फाइल को ईधर- उधर भेजना नहीं पड़ेगा। फाइल को ऑनलाइन ही एक जगह से दूसरे जगह भेजा जाएगा।

शिक्षा विभाग में लगभग काम पेपरलेस कर दिया गया है। इसके बाद विश्वविद्यालय को पेपरलेस करने का निर्देश दिया गया है। इसको लेकर अब पटना विश्वविद्यालय भी इस तरफ काम करना शुरू कर दिया है।

अभी तक एक विभाग से दूसरे विभाग या विश्वविद्यालय के एक विभाग से दूसरे विभाग में कर्मचारियों द्वारा फाइल लाने ले जाने का काम किया जाता था। इसमें कई बार काम पेंडिंग रह जाता था, लेकिन पेपरलेस होने से काम में तेजी आएगी। फाइल मिनट भर में एक जगह से दूसरे जगह पर भेजा जा सकेगा। इससे पेंडिंग काम को जीरो स्तर पर लाने में मदद मिलेगी।

नहीं रहेगा कोई भी फाइल लंबित

विश्वविद्यालय में हर दिन का काम उसी दिन निबटाया जाएगा। सुबह से जो भी फाइल होगा, उसे तुरंत संबंधित विभाग में ऑनलाइन भेजा जाएगा।

संबंधित विभाग द्वारा उसी दिन फाइल पर काम करके तुरंत कुलपति या कुलसचिव के पास भेज दिया जाएगा। इसके लिए काम लंबित नहीं रहेगा और उसी दिन घंटे दो घंटे में काम समाप्त हो जाएगा।

आठवीं मंजिल पर कुलपति और पांचवीं पर कुलसचिव कार्यालय

प्रशासनिक भवन के आठवीं मंजिल पर कुलपति कक्षा और कार्यालय होगा। इस मंजिल पर कांफ्रेंस हाल भी रहेगा। प्रतिकुलपति सातवीं और कुलसचिव कार्यालय पांचवीं मंजिल पर है। ऐसे में इनके बीच फाइल का आदान प्रदान पेपरलेस होने से काम जल्दी होगा।

इस शैक्षणिक सत्र यानी जुलाई तक नए प्रशासनिक भवन में शिफ्ट होने की संभावना है। भवन बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है, अब अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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