उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा पांच साल बाद निकाली गई 217 राजकीय डिग्री कालेजों के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में अभ्यर्थियों के बीच विषयवार कड़ी प्रतिस्पर्धा दिखेगी। 1253 पदों के लिए 1,14,955 आवेदन हुए हैं। यानी, औसतन एक पद पर 92 अभ्यर्थी दावेदार हैं। सबसे अधिक प्रतिस्पर्धा कला एवं सामाजिक विज्ञान के विषयों में दिख रही है।
शिक्षाशास्त्र में एक पद पर 472, इतिहास में एक पद के लिए 194 दावेदार हैं। हिंदी में 185 और राजनीति विज्ञान में एक पद के सापेक्ष 184 अभ्यर्थी मैदान में हैं। कंप्यूटर साइंस के एक मात्र पद पर 573, उर्दू के तीन पदों पर 262 की दावेदारी है। विषयवार आवेदन के आंकड़े बताते हैं कि पारंपरिक विषयों में सीटें सीमित होने के बावजूद अभ्यर्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
वाणिज्य में सर्वाधिक 157 पद हैं। इनमें एक पद पर 54 के बीच प्रतिस्पर्धा है। अंग्रेजी में 92 पदों के सापेक्ष हर पद पर चयन के लिए 53 उम्मीदवारों के स्पर्धा होगी । हिंदी और रसायन विज्ञान (87-87), वनस्पति, जंतु विज्ञान और गणित (79-79) जैसे विषयों में भी संघर्ष होगा। फारसी में केवल एक-एक पद तथा सांख्यिकी और सैन्य विज्ञान में दो-दो पद होने से इन विषयों के अभ्यर्थियों में अवसरों की कमी साफ दिखती है।
हिंदी में 87 पदों के सापेक्ष 16,098, इतिहास में 58 पदों के सापेक्ष 11,272, राजनीति विज्ञान में 57 पदों के सापेक्ष 10,519 और शिक्षाशास्त्र में 14 पदों के सापेक्ष 6616 आवेदन आए हैं।
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती (विज्ञापन संख्या-51) की पुनर्परीक्षा के आयोजन को लेकर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। किस सिरीज के प्रश्नपत्र से परीक्षा कराई जाएगी, यह परीक्षा से कुछ समय पहले कंप्यूटर के माध्यम से तय होगा। प्रश्नपत्र की सिरीज तय करने के लिए पांच बार रेंडमाइज (अनियमित) कराया जाएगा।
परीक्षार्थियों को अनियमित क्रम में अनुक्रमांक आवंटित किए गए हैं। इससे जुड़वा या भाई-बहन, पति-पत्नी, गांव के नाम एक होने पर भी सभी को अलग-अलग केंद्र आवंटित हुए हैं। एसटीएफ ने शिक्षा सेवा चयन आयोग के कई अधिकारियों व कर्मचारियों के नंबर सर्विलांस पर लगाए हैं।


