महिला वोटरों की कमी से सियासी दलों की बढ़ी बेचैनी, मतदाताओं में करीब 23 प्रतिशत का अंतर

विधानसभा मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान (एसआइआर) के बार राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना बढ़ गई है। इससे सभी प्रमुख दलों को नए सिरे से अपनी रणनीति पर मंथन करना पड़ सकता है।

बलरामपुर के चारों विधानसभा में बड़ी संख्या में महिला वोटरों का नाम सूची से कट गया है। महिला और पुरुष मतदाताओं में यह अंतर करीब 23 प्रतिशत का है।

विपक्षी दल इसका मुख्य कारण नेपाल से शादी रचाकर आई बेटियों का पुराने मतदाता सूची (2003) से सत्यापन न हो पाने को मानते हैं, जबकि भाजपा महिलाओं के स्थान परिवर्तन को मान रही है। मानना है कि शादी के बाद बेटियां दूसरे जिले या प्रदेश में हैं, जिससे पुरानी सूची से उनका नाम इस बार हट गया।

जिले में चार विधानसभा तुलसीपुर, गैंसड़ी, उतरौला और बलरामपुर है। वर्तमान में इसमें से तीन पर भाजपा के कैलाश नाथ शुक्ल, राम प्रताप वर्मा, पल्टूराम व गैंसड़ी से सपा के राकेश यादव विधायक हैं। जिला नेपाल सीमा से सटा है, जिससे लोगों की नेपाल में अधिक रिश्तेदारी है।

चारों विधानसभाओं में महिलाओं के सबसे अधिक मत 47,772 उतरौला में कटे हैं। दूसरे नंबर पर बलरामपुर है, जहां 47,542 मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं। तुलसीपुर में 31,820 व गैंसड़ी 28,984 मत महिलाओं के कटे हैं।

राजनीतिक विश्लेषक भीम सिंह कहते हैं कि वोटरों की संख्या घटने से न केवल चुनावी परिणाम प्रभावित होते हैं, बल्कि क्षेत्र में पार्टी की पकड़ और प्रभाव भी कमजोर होता है। इससे विरोधी दलों को सीधा फायदा मिल सकता है और चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। स्थानीय स्तर पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

राजनीतिक दल अब अपने कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची की गहन जांच और छूटे हुए नामों को जुड़वाने के लिए सक्रिय करेंगे। पार्टियों की ओर से बूथ स्तर पर अभियान चलाकर अधिक से अधिक लोगों का नाम सूची में सुनिश्चित कराने की कोशिश की जाएगी। यदि समय रहते राजनीतिक दलों के गंभीर न होने पर आगामी चुनावों में कई सीटों पर अप्रत्याशित परिणाम सामने आ सकते हैं।

कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग प्रदेश सचिव राज बहादुर यादव का कहना है कि महिलाओं का नाम बड़ी संख्या में कटा है। सभी के लिए घातक है।

नेपाल से वर्षों पहले शादी करके आई महिलाओं का नाम अभिलेखों के कारण कट गया, जबकि वह पिछले चुनावों में मतदान करती रहीं है। यहां उनके नाम से जमीन बैनामा भी है। इसके बाद भी 2003 की सूची से सत्यापन के लिए भारत की नागरिकता मांगे जाने से वह मतदाता बनने से वंचित रह गईं।

आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और सरकार अपने अनुसार एसआइआर कराया है। बसपा जिलाध्यक्ष लालचंद ने बताया कि अब नागरिकता दिलाने की लड़ाई लड़ी जाएगी। जिनके नाम सूची से कटे हैं उनको पुन: जोड़ा जाएगा।

भाजपा जिलाध्यक्ष रवि मिश्र का कहना है कि एसआइआर पूरी पारदर्शिता से की गई है। 10 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष पूरे करने वालों को मतदाता बनाने के लिए कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

विधानसभा वार महिला मतदाताओं की संख्या:

  • तुलसीपुर – 1,42011
  • गैंसड़ी – 1,36,625
  • उतरौला -1,47,327
  • बलरामपुर -1,47,128
  • कुल महिला मतदाता – 5,73,091
  • कुल पुरुष मतदाता – 7,37,627

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