बहुचर्चित शिकोहपुर जमीन घोटाला मामले में ट्रायल चलेगा या नहीं? 15 अप्रैल को आएगा फैसला

बहुचर्चित शिकोहपुर जमीन घोटाले में ट्रायल चलेगा या नहीं, फैसला 15 अप्रैल को आएगा। मामले में ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट पर सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट में पूरी हो चुकी है। कोर्ट ने 15 अप्रैल तक के लिए फैसला सुरक्षित रख लिया है।

मामले में आरोप है कि जमीन सौदे को लेकर राबर्ट वाड्रा की कंपनी के खाते से पेमेंट नहीं किए गए थे। यही नहीं स्टांप ड्यूटी के रूप में 45 लाख रुपये भी वाड्रा की कंपनी के किसी खाते से जमा नहीं कराए गए थे

क्या है पूरा मामला?

जिले के गांव शिकोहपुर के सामने दिल्ली-जयपुर हाईवे के नजदीक रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी लक्ष्य बिल्टेक की 15 बीघा जमीन थी। वर्ष 2006 के दौरान जमीन एक अन्य रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज ने खरीद ली थी। इसमें से लगभग साढ़े तीन एकड़ जमीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद व सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के पति राबर्ट वाड्रा द्वारा संचालित कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी ने खरीद ली।

यह सौदा साढ़े सात करोड़ रुपये में 12 फरवरी 2008 को स्काईलाइट हास्पिटेलिटी ने ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के साथ किया था। आरोप है कि सौदे के लिए जो चेक दिए गए थे, वे खाते में जमा ही नहीं हुए। स्टांप ड्यूटी के 45 लाख रुपये भी स्काईलाइट हास्पिटेलिटी के खाते से जमा नहीं हुए थे।

कंपनी के खाते से पेमेंट नहीं किए जाने का है आरोप

यह भी आरोप लगा कि सौदा होने के कुछ समय बाद स्काईलाइट हॉस्पिटेलिटी ने टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से कमर्शियल लाइसेंस हासिल कर लिया। लाइसेंस देने में नियमों को ताक पर रखा गया था। लाइसेंस हासिल करने के बाद कंपनी ने 18 सितंबर 2012 को रियल एस्टेट सेक्टर की कंपनी डीएलएफ यूनिवर्सल से लगभग 58 करोड़ रुपये में बेच दी।

शिकायतकर्ता सुरेंद्र शर्मा ने खेड़कीदौला थाने में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि डीएलएफ यूनिवर्सल कंपनी के 58 करोड़ रुपये तो वाड्रा की कंपनी के खाते में जमा हुए थे, लेकिन ओंकारेश्वर प्रापर्टीज को अदा किए गए साढ़े सात करोड़ रुपये वाड्रा की कंपनी के किसी भी खाते से नहीं निकले थे। इससे साफ है कि वाड्रा की कंपनी को बिना कुछ खर्च किए ही लगभग 58 करोड़ रुपये मिले गए।

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