अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (एडीएजी) और उसकी कंपनियों से जुड़ी बड़े पैमाने पर बैंकिंग धोखाधड़ी की जांच में सीबीआइ और ईडी की ओर से दिखाई जा रही अनिच्छा पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नाराजगी व्यक्त की। शीर्ष अदालत ने दोनों जांच एजेंसियों को इस मामले में निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच करने का निर्देश दिया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सीबीआइ व ईडी की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर गौर किया और सभी संबंधित वित्तीय संस्थानों को ईडी को पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया।
शीर्ष अदालत पूर्व ब्यूरोक्रेट ईएएस सरमा की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली एडीएजी की कंपनियों द्वारा 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक की ऋण धोखाधड़ी की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है।
शुरुआत में मेहता ने पीठ को बताया कि कोर्ट के पूर्व आदेश पर एसआइटी गठित की गई है जिसमें ईडी के वरिष्ठ अधिकारी व बैंकिंग क्षेत्र के वित्तीय विशेषज्ञ शामिल हैं। जांच एजेंसियों ने अब तक 15,000 करोड़ की संपत्ति कुर्क की है और वरिष्ठ अधिकारियों समेत चार लोगों को गिरफ्तार भी किया है।
सरमा के वकील प्रशांत भूषण ने सेबी की रिपोर्ट का हवाला देकर कहा कि सीबीआइ ने अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की। मेहता ने कहा कि गिरफ्तारियां की गई हैं। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ”हम (उन्हें) यह निर्देश नहीं दे सकते कि किसे गिरफ्तार करना है; लेकिन उन्हें समयसीमा के भीतर बताना चाहिए कि उन्हें क्या मिला है। आपकी जांच से सिर्फ हमें नहीं, बल्कि हर किसी में विश्वास पैदा होना चाहिए।”


