जनवरी में इंदौर में हुई घटना ने दूषित पानी से होने वाली समस्या की गंभीरता को उजागर किया। इसके बाद बाद नोएडा और दिल्ली से भी कई इलाकों में प्रदूषित पेयजल आपूर्ति की समस्याएं सामने आईं। इन घटनाओं के बाद अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है, कि जो पानी हम पी रहे हैं सुरक्षित है भी या नहीं?
दिल्ली समेत एनसीआर के लोगों की इस बड़ी चिंता के समाधान के लिए सतर्क नागरिक खुद आगे आए हैं। अर्थ वारियर्स संस्था ने पेयजल गुणवत्ता की जांच के लिए सिटिजन वाटर टेस्टिंग लैब शुरू की है। इसके जरिये आम लोग घरों में पानी की जांच करा सकेंगे।
आए दिन लोग दूषित जलापूर्ति की गंभीर समस्या झेलते हैं और आरडब्ल्यूए व स्थानीय लोग बदबूदार, गंदे और सीवर युक्त पानी की आपूर्ति को लेकर विभागों से शिकायतें करते रहते हैं। ऐसे में घरों में पानी की गुणवत्ता को लेकर दुविधा होने पर लोग इस लैब की मदद ले सकते हैं।
पानी में बदबू, रंग या स्वाद की समस्या होने पर पानी के नमूने की फोटो वाट्सएप नंबर 8796062203 पर भेजनी होगी। इसके बाद लैब के सदस्य संपर्क कर पानी के नमूने एकत्रित करेंगे। लैब में नमूनों की जांच के बाद भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) के अनुसार रिपोर्ट पोर्टल पर जारी की जाएगी।
दिल्ली में पांच नमूनों की जांच, मिले असुरक्षित
अर्थ वारियर टीम की ओर से पिछले 10 दिनों में दिल्ली-एनसीआर से कुल 21 पानी के नमूने एकत्रित किए गए हैं। दिल्ली की बात करें तो पांच नमूने विभिन्न इलाकों के सार्वजनिक स्थानों से लिए गए थे। सभी जगह फ्री रेसिडुअल क्लोरीन (एफआरसी) 0.01 से 0.19 तक पाया गया है, जोकि 0.2 से 0.5 (एमजी प्रति लीटर) होनी चाहिए।
इसके अलावा तीन नमूनों में टीडीएस (टोटल डिजाल्वड सालिड्स) की मात्रा 535, 854 और 1061 तक पाई गई, जोकि मानकों से ज्यादा है। वहीं दो नमूनों का स्वाद कड़वा पाया गया और एक में टर्बिडिटी (धुंधलापन या गंदापन) का स्तर 3.71 रहा, जोकि 1 एनटीयू से कम होनी चाहिए।


