बिना अंडों के क्यों अधूरा है Easter Sunday का जश्न… आखिर कैसे शुरू हुई इन्हें रंगने की रस्म

ईस्टर संडे का दिन ईसाई समुदाय के लिए महज एक तारीख नहीं, बल्कि परमेश्वर के प्रति अटूट भरोसे का प्रतीक है। बता दें, इस साल ईस्टर संडे 5 अप्रैल को पड़ रहा है। गुड फ्राइडे के ठीक दो दिन बाद आने वाला यह खास दिन मुख्य रूप से यीशु के मृत्यु के बाद फिर से जीवित हो उठने की याद में मनाया जाता है।

मृत्यु पर जीवन की महान विजय

कई लोग ईस्टर को सिर्फ वसंत ऋतु के आगमन या रंग-बिरंगे अंडों तक सीमित मान लेते हैं, जबकि इसका असली अर्थ इससे कहीं ज्यादा गहरा है। यह बुराई पर अच्छाई और मृत्यु पर जीवन की परम विजय का उत्सव है। मान्यता के मुताबिक, जब यीशु मसीह को सूली पर चढ़ाया गया और दफनाया गया, तो वे तीसरे दिन चमत्कारिक रूप से दोबारा जीवित हो गए।

यीशु ने सूली पर चढ़ने से पहले ही अपने वापस लौटने की भविष्यवाणी कर दी थी। उनके इस वादे के पूरा होने से लोगों का ईश्वर पर भरोसा हमेशा के लिए अटूट हो गया। ईस्टर वह दिन है जब सारा दुख एक महान आनंद में बदल जाता है।

गुड फ्राइडे से भी बढ़कर है इसका महत्व

कम ही लोग जानते हैं कि ईसाई धर्म में ईस्टर संडे का महत्व गुड फ्राइडे से भी ज्यादा माना गया है। यह पर्व केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, यह पापों से मुक्ति पाने और बिगड़ी हुई चीजों को फिर से संवारने का संदेश देता है।

यीशु का पुनर्जीवित होना ईश्वर के प्रेम, उनकी अपार शक्ति और उनके द्वारा किए गए वादों के सच होने का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है। यही कारण है कि यह दिन दुनियाभर के लोगों को ईश्वर के करीब लाता है और आज के समय में भी उनके भीतर एक सच्ची उम्मीद जगाता है।

रंगीन अंडों से क्यों है ईस्टर का कनेक्शन?

ईस्टर संडे के दिन ‘ईस्टर एग्स’ को सजाने की बहुत ही अनूठी और पुरानी परंपरा है। ईस्टर के पूरे वीक में मीट और अल्कोहल से पूरी तरह परहेज किया जाता है, लेकिन अंडों को रंगने की शुरुआत आज से नहीं, बल्कि 13वीं शताब्दी से हुई थी। उस समय मुर्गियों के अंडों को बेहद पवित्र माना गया और उन्हें एक नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में रंगा जाने लगा।

अंडे और यीशु के पुनर्जन्म का संबंध

अंडों को सजाने के पीछे एक बेहद खूबसूरत सोच छिपी है। दरअसल, जिस तरह एक अंडे के कड़े खोल को तोड़कर उसके अंदर से एक नया जीवन बाहर आता है, ठीक उसी तरह यीशु मसीह भी मौत को हराकर कब्र से बाहर आ गए थे।

इस परंपरा में एक पुरानी रूढ़िवादी मान्यता भी शामिल है। इस शाखा को मानने वाले लोग अंडों को विशेष रूप से लाल रंग से रंगते हैं। यह लाल रंग उस पवित्र खून का प्रतीक माना जाता है, जो यीशु मसीह ने सूली पर बहाया था।

आज भी दुनिया भर में लोग अंडों को सजाने की इस खूबसूरत परंपरा को पूरे उत्साह के साथ निभाते हैं, जो उन्हें उनके धर्म और इतिहास से जोड़े रखती है।

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