एमपी-यूपी सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनी में इस बार मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की पारंपरिक कलाओं ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। विशेष रूप से रीवा की सुपारी क्राफ्ट कला ने सभी का मन मोह लिया। मध्य प्रदेश के रीवा से आई अनुष्का कुंदेर ने अपनी अद्वितीय कला से दर्शकों को चौंका दिया।
उनके परिवार की पीढ़ियों से सुपारी से सजावटी वस्तुएं बनाने की परंपरा चली आ रही है। छोटी सी सुपारी को तराशकर ताजमहल, देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और टेबल लैंप जैसे आकर्षक उत्पाद बनाना उनकी विशेषता है। अनुष्का ने बताया कि इस कला की शुरुआत उनके परदादा भगवानदास कुंदेर ने की थी। सुपारी के अंदर की प्राकृतिक डिजाइन से प्रेरित होकर उन्होंने इसे नई दिशा दी, जो अब पांचवीं पीढ़ी तक पहुंच चुकी है।
प्रदर्शनी में चंदेरी की प्रसिद्ध साड़ियां और उज्जैन के भैरवगढ़ क्षेत्र की बाटिक प्रिंट साड़ियां भी लोगों ने खूब सराही। इसके अलावा, बदरवास जैकेट और मेटल क्राफ्ट उत्पादों की भी अच्छी मांग रही। उत्तर प्रदेश की ओर से गुलाबी मीनाकारी, ग्लास ज्वैलरी और लकड़ी के खिलौनों जैसे जीआइ टैग उत्पाद भी प्रदर्शनी में शामिल रहे, जिन्हें दर्शकों ने पसंद किया।
इस दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी प्रदर्शनी का दौरा किया और कलाकारों से बातचीत की, उनकी कला की सराहना की। प्रदर्शनी के माध्यम से दोनों राज्यों की पारंपरिक हस्तकलाओं को नया मंच मिला, जिससे कलाकारों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
इस प्रकार, इस प्रदर्शनी ने न केवल पारंपरिक कलाओं को प्रदर्शित किया, बल्कि कलाकारों को एक नया मंच भी प्रदान किया। यह आयोजन दर्शाता है कि कैसे हस्तशिल्प की कला को संरक्षित किया जा सकता है और इसे नई पीढ़ी के सामने लाया जा सकता है। इस प्रकार की गतिविधियों से न केवल कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि यह सांस्कृतिक धरोहर को भी सहेजने में मदद करता है। इस प्रदर्शनी ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय हस्तशिल्प की विविधता और गहराई को समझने और सराहने की आवश्यकता है।


