विद्युत नियामक आयोग द्वारा सोमवार को झांसी में बिजली दरों पर की गई सार्वजनिक सुनवाई में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की दिक्कतों को उपभोक्ताओं ने जोर शोर से उठाया। आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार ने कहा कि रिचार्ज के बाद दो घंटे के अंदर स्मार्ट प्रीपेड मीटर कनेक्शन से न जुड़ें तो उपभोक्ता मुआवजे की मांग करें। स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर आ रही शिकायतों की छानबीन की जा रही है।
सुनवाई में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने स्मार्ट मीटर के लिए 18,885 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की थी लेकिन राज्य में 27,342 करोड़ रुपये में इसका टेंडर उद्योगपतियों को दिया गया। इस मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस निकल रहा है। इसके एवज में बिजली दरें कम की जानी चाहिए। संविदा कर्मियों की छंटनी को गलत बताते हुए टोरेंट पावर के अनुबंध को समाप्त करते हुए निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी उठाई।
वर्मा ने बुंदेलखंड को विशेष पैकेज के तहत बिजली दरों में राहत दिए जाने का मुद्दा उठाया, कहा कि पहले इस क्षेत्र को विशेष पैकेज दिया जाता रहा है। बिजली महंगी होने के कारण अब बुंदेलखंड से उद्योगों का पलायन का पलायन हो रहा है, इसे रोकना चाहिए।
आयोग को बताया कि एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें पावर कारपोरेशन अध्यक्ष कह रहे हैं एक अप्रैल आ रहा है जिन अभियंताओं पर कार्यवाइ करनी है उन्हें चिन्हित कर लें। आयोग इसमें हस्तक्षेप करें।
प्रदेश से रोस्टर व्यवस्था समाप्त कर सभी क्षेत्रों को 24 घंटे बिजली देने, मछली पालन को कृषि का दर्जा देने तथा अपने घरों में छोटी दुकान खोलकर जीवनयापन कर रहे उपभोक्ताओं को घरेलू श्रेणी का बिजली उपयोग करने की छूट दिए जाने की मांग भी उठी। सुनवाई में आयोग के सदस्य संजय कुमार सिंह के साथ ही दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।


