केरलम में एफसीआरए विधेयक पर सियासी घमासान, विपक्ष और चर्च ने की पुनर्विचार की मांग

केरलम में एफसीआरए संशोधन विधेयक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनकर उभरा है। वामपंथी दलों के गठबंधन एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन यूडीएफ ने रविवार को केंद्र सरकार से विधेयक पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। विदेशी अंशदान को नियंत्रित करने वाले मौजूदा मानदंडों में संशोधन करने के लिए लोकसभा में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक को पेश किया गया है।

विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में प्रस्तावित संशोधन पर चिंता जताते हुए कहा, वह प्रविधान विशेष चिंता का विषय है, जिसके तहत केंद्र सरकार लाइसेंस के नवीनीकरण न कराने या इसमें देरी पर संगठनों की संपत्तियों को निगरानी में ले सकती है। इस बीच माकपा ने इस विधेयक को अल्पसंख्यकों पर हमला करार दिया है।

सिरो-मालाबार चर्च ने जताई चिंता

विधेयक में गैर सरकारी संगठनों, ट्रस्टों, समितियों और विदेशी योगदान प्राप्त करने वाली अन्य संस्थाओं से संबंधित कड़े प्रविधान हैं। इन प्रविधानों से अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों पर कब्जे का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। सिरो-मालाबार चर्च के आर्कबिशप थामस थरायिल ने भी प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता जताई और कहा कि चर्च ने पुनर्विचार के लिए केंद्र से संपर्क किया है।

केरल कैथोलिक बिशप्स काउंसिल (केसीबीसी) और कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) ने पहले ही इसी तरह की चिंताएं जताई हैं। थरायिल ने कहा कि चर्च दशकों से कल्याणकारी गतिविधियों के लिए विदेश से धन प्राप्त कर रहा है। इस फंड की मदद से हम गांवों में स्कूल और अस्पताल बना पाए हैं। इन्हें सेवा कार्य मानने के बजाय राष्ट्रविरोधी बताना दुखद है।

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