बड़े-बड़े दावे, रंगीन नक्शे और इतिहास दिखाने के सपने लेकिन हकीकत यह है कि सिद्धार्थ विहार में प्रस्तावित थीम आधारित पार्क आज भी सिर्फ कागजों में ही सिमटा हुआ है।
आठ साल पहले आवास विकास परिषद ने 47 एकड़ में भव्य थीम पार्क बनाने का खाका खींचा था, जिसमें जनपद के इतिहास को जीवंत रूप देने की बात कही गई थी। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि जहां पार्क बनना था, वहां आज किसान खेती कर रहे हैं।
आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने उस समय दावा किया था कि यह पार्क दिल्ली-एनसीआर का सबसे बड़ा थीम पार्क होगा। यहां दिल्ली गेट, सिहानी गेट, घंटाघर, मकनपुर के मकबरे जैसे स्थलों की झलक दिखाई जाएगी।
शिलालेखों पर गाजियाबाद के इतिहास को उकेरा जाएगा, ताकि नई पीढ़ी अपने शहर की विरासत को जान सके। लेकिन यह तमाम बातें फाइलों तक सीमित रह गई हैं।
जहां प्रस्तावित है योजना, वहां लहलहा रही फसल
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस जमीन को इतिहास संजोने के लिए आरक्षित किया गया था, वहां आज गेहूं और धान की फसल लहलहा रही है। लोग तंज कसते हैं कि थीम पार्क की जगह फार्म पार्क जरूर विकसित हो गया है।
लोगों का कहना है कि कहीं आवास विकास परिषद इस कीमती जमीन को चुपचाप किसी बिल्डर के हवाले न कर दे। इस संबंध में अधिशासी अभियंता विकास कुमार गौतम ने बताया कि पार्क बनाने को लेकर अभी कोई योजना नहीं आई है। यदि कोई योजना आती है तो पार्क का निर्माण कराया जाएगा।


