भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टीवर्ट स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की वर्ष 1999 में हुई नृशंस हत्या के दोषी दारा सिंह की रिहाई की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 मई को तय करते हुए ओडिशा सरकार से संबंधित रिपोर्ट पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति मनमोहन और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की द्वि-न्यायाधीशीय पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य की सजा समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे की सुनवाई की जाएगी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ए.के. सिंह ने दलील दी कि दारा सिंह, जिन्हें रबींद्र कुमार पाल के नाम से भी जाना जाता है, 26 वर्ष 6 माह से अधिक की सजा काट चुके हैं। उन्होंने कहा कि दोषी 25 वर्ष से अधिक समय जेल में बिता चुका है, जो आजीवन कारावास की “अधिकतम अवधि” से भी अधिक है। ऐसे में उसे रिहाई के लिए विचार किया जाना चाहिए।
अनुशासनहीनता की नहीं मिली शिकायत
अधिवक्ता ने जेल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए बताया कि दारा सिंह का आचरण जेल में संतोषजनक रहा है। वह योग और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है तथा उसके खिलाफ किसी प्रकार की हिंसा या अनुशासनहीनता की शिकायत नहीं है। उन्होंने अदालत से राज्य की माफी नीति के तहत रिहाई पर विचार करने का अनुरोध किया।
वहीं, ओडिशा सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल पीतांबर आचार्य ने अदालत को बताया कि दोषी की रिहाई से संबंधित जिला प्रशासन और जेल अधिकारियों की रिपोर्टों की समीक्षा जारी है। उन्होंने कहा कि मामला ओडिशा कैदी माफी नीति-2022 के तहत परखा जा रहा है।
13 मई तक सुनवाई टली
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि ओडिशा सजा समीक्षा बोर्ड द्वारा सभी पहलुओं की विस्तृत जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने समीक्षा बोर्ड को 13 मई तक अपना निर्णय लेने का समय दिया और मामले को उसी तिथि तक स्थगित कर दिया।


