हरकी पैड़ी की तंग गलियों में गैस सिलेंडरों का ‘बारूद घर’, लगातार हो रहे अग्निकांड

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धर्मनगरी के सबसे महत्वपूर्ण हरकी पैड़ी क्षेत्र की तंग गलियों में संचालित होटल और रेस्टोरेंटों में रसोई गैस सिलिंडरों का उपयोग खतरे का कारण बन रहा है। घनी आबादी, संकरी गलियां और दिनभर उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच सुरक्षा इंतजामों के बिना गैस सिलिंडरों का जमकर भंडारण किया जा रहा है। जबकि आए दिन दुकानों में आग लगने की घटनाएं सामने अा रही हैं। लेकिन कार्यवाही सिर्फ आग बुझाने तक सीमित रहती है।

कारोबारियों से लेकर पुलिस-प्रशासन तक, कोई भी खतरे की घंटी को भांप नहीं पा रहा है। शायद किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है। दो दिन पहले विष्णुघाट पर तीन दुकानों में आग लगने के दौरान गैस सिलिंडर फटने से भयावह तस्वीर सामने आई। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। इसके बावजूद, इस समस्या से निपटने के लिए कोई पहल नहीं हुई।

कई प्रतिष्ठानों में एक से अधिक सिलिंडर एक साथ रखे जाते हैं। कुछ स्थानों पर तो बैकअप के नाम पर चार से पांच सिलेंडर तक रसोई के भीतर या संकरी सीढ़ियों के पास रख दिए जाते हैं। पास में ही चूल्हा जलाकर पकवान बनाए जाते हैं। पाइपलाइन और रेगुलेटर की नियमित जांच को लेकर भी कोई ठोस व्यवस्था दिखाई नहीं देती।

ऐसे में मामूली चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। हरकी पैड़ी क्षेत्र और आसपास की गलियों में आग लगने की घटनाएं लगातार हो रही हैं। हालांकि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि जोखिम वास्तविक है। किसी दिन भीड़भाड़ के समय आग लग जाए तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।

गलियों में नहीं पहुंचते दमकल वाहन

हरकी पैड़ी क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या इसकी भौगोलिक संरचना है। गलियां इतनी संकरी हैं कि बड़े अग्निशमन वाहन भीतर तक नहीं पहुंच सकते। कई स्थानों पर तो दुपहिया वाहन तक मुश्किल से निकल पाते हैं। ऐसी स्थिति में दमकल कर्मियों को पाइप लाइन बिछाकर दूर से पानी पहुंचाना पड़ता है, जिससे राहत कार्य में देरी की आशंका बनी रहती है।

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