रेलवे ट्रैक से गुजरती है अंतिम यात्रा, 79 साल बाद भी श्मशान घाट का इंतजार

 पलनवा थाना क्षेत्र विकास और बुनियादी सुविधाओं के सरकारी दावों के बीच भेलाही थाना क्षेत्र के भेलाही गांव की तस्वीर अलग कहानी बयां कर रही है। करीब 2500 की आबादी वाले इस गांव के लोगों को आज भी अंतिम यात्रा रेलवे ट्रैक से होकर निकालनी पड़ती है।

स्थायी श्मशान घाट नहीं होने के कारण ग्रामीणों को रेलवे की जमीन पर अंत्येष्टि करने और शव यात्रा के दौरान रेलवे लाइन पार करने को मजबूर होना पड़ता है।

कहीं कोई हादसा न हो जाए…

ग्रामीणों का कहना है कि जीवनभर सुख-दुख के बीच समय बीत जाता है, लेकिन अंतिम विदाई के समय भी भय बना रहता है। लोगों को हर पल इस बात की चिंता सताती है कि कहीं शव यात्रा के दौरान कोई ट्रेन न आ जाए और हादसा न हो जाए।

स्थानीय ग्रामीण रणधीर गुप्ता, आनंद सर्राफ, रामप्रसाद गुप्ता, विनय भारतीय और व्यवसायी धनंजय गुप्ता ने बताया कि गांव में वर्षों से श्मशान घाट निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी है।

क्या बोले मुखिया?

वहीं, स्थानीय मुखिया सुमन पटेल ने बताया कि इस संबंध में अनुमंडल प्रशासन, जिला प्रशासन और रेलवे विभाग को कई बार आवेदन दिया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक समाधान नहीं निकल सका है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से जल्द श्मशान घाट के लिए भूमि चिह्नित कर निर्माण कराने की मांग की है।

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