5 करोड़ से बनेगी बिहार की पहली मॉडल ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान इकाई, इलाज व रिसर्च दोनों की सुविधा

 ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली बीमारियों के अध्ययन और उनके बेहतर इलाज के लिए अब बड़ा कदम उठाया गया है। मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी में राज्य की पहली मॉडल ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान इकाई स्थापित की जाएगी।

करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह केंद्र गांवों में पाई जाने वाली बीमारियों पर शोध करने के साथ मरीजों को इलाज की सुविधा भी उपलब्ध कराएगा।

इस केंद्र की स्थापना भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के तहत की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में होने वाली बीमारियों, विशेषकर अनुवांशिक रोगों का अध्ययन करना और उनके प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है।

यहां मातृ आयु की महिलाओं में होने वाली बीमारियों जैसे एनीमिया, उच्च रक्तचाप और मधुमेह, बच्चों में दस्त, तथा मलेरिया और डेंगू जैसी बीमारियों पर शोध किया जाएगा। इसका लक्ष्य आधुनिक स्वास्थ्य तकनीकों को ग्रामीण आबादी तक पहुंचाना और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करना भी है।

अभी तक इन बीमारियों की जांच के लिए नमूने पटना या दिल्ली भेजने पड़ते थे, लेकिन कुढ़नी में स्थापित होने वाली इस इकाई में वैज्ञानिक स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उपचार पद्धति विकसित करेंगे।

तीन संस्थानों के सहयोग से संचालन

यह परियोजना भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के अधीन राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरएमआरआई), पटना और श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एसकेएमसीएच), मुजफ्फरपुर के संयुक्त प्रयास से संचालित की जाएगी।

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