ईरान पर अटैक को लेकर चीन का रिएक्शन, क्या US-इजरायल हमलों के बीच Iran से तेल नहीं खरीद रहा ड्रैगन?

 ईरान और चीन के बीच पिछले कुछ सालों में रिश्ते काफी मजबूत होते नजर आए हैं। ईरान, चीन के लिए सबसे बड़े तेल सप्लायर में से एक है।

इजरायल और अमेरिका के ईरान पर हमला करने से इस रिश्ते पर प्रभाव पड़ता नजर आ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन हमलों के बीच चीन ने ईरान से तेल खरीदना कम कर दिया है।

ईरान पर हुए हमलों पर चीन का रिएक्शन

ईरान पर अमेरिका-इजरायल के साझा हमले को लेकर चीन का रिएक्शन आया है। चीन ने इस हमले की निंदा की है और इसके साथ ही सीजफायर की अपील भी की है।

अमेरिका और इजरायल ने मिलकर 28 फरवरी को तेहरान, इस्फहान और कोम में ईरानी न्यूक्लियर फैसिलिटी, मिसाइल इंस्टॉलेशन और लीडरशिप कंपाउंड पर हमले किए।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इस हमले को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया और इसे महीनों से रुकी हुई न्यूक्लियर बातचीत और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बाद एक अहम झटका बताया।

ईरान से तेल नहीं खरीद रहा चीन

ईरान के तेल एक्सपोर्ट का करीब 80 फीसद से हिस्सा चीन खरीदता है। इसका मतलब है कि चीन ने ईरान से हर दिन लगभग 1.38 मिलियन बैरल तेल खरीदा, जो चीन के कुल समुद्री कच्चे तेल के इंपोर्ट का लगभग 13-14 फीसद है।

चीन के दो सबसे बड़े सप्लायर रूस और सऊदी अरब बने हुए हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बाद से चीनी रिफाइनर कंपनियों ने चुपचाप ईरान से खरीदारी कम कर दी है और कुल सप्लाई को स्थिर रखने के लिए डिस्काउंट वाले रूसी बैरल पर ज्यादा निर्भर हो गई हैं।विदेश मामलों के जानकार रॉबिन्द्र सचदेव ने भी जागरण से बातचीत में बताया कि चीन ने US-इजरायल हमलों के बीच ईरान से तेल खरीदना कम कर दिया है।

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