साहेबगंज–मानिकपुर फोरलेन सड़क परियोजना के निर्माण में स्कूल, आंगनबाड़ी और अन्य सरकारी भवन बड़ी बाधा बन गए हैं।
राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) में आ रही इन संरचनाओं के कारण निर्माण कार्य की रफ्तार प्रभावित हो रही है। इसे लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) छपरा के परियोजना निदेशक राजू कुमार ने जिलाधिकारी को विस्तृत रिपोर्ट भेजी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि फोरलेन के निर्धारित एलाइनमेंट में आने वाले भवनों को शिफ्ट किए बिना आगे काम संभव नहीं है। एनएचएआइ ने संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर इन संरचनाओं को स्थानांतरित कराने का अनुरोध किया है, ताकि परियोजना तय समय सीमा में पूरी हो सके।
एनएचएआइ के अनुसार, पारू प्रखंड में तीन और साहेबगंज प्रखंड में दो सरकारी भवन आरओडब्ल्यू में पड़ रहे हैं। इनमें पारू के लालू छपरा स्थित हेल्थ केयर सेंटर, जगदीशपुर धर्मू का प्राथमिक विद्यालय, आनंदपुर खरौनी का आंगनबाड़ी केंद्र तथा साहेबगंज के पकरी बसारत में सामुदायिक केंद्र और प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले भी एनएचएआइ ने 13 अन्य संरचनाओं आंगनबाड़ी केंद्र, धार्मिक स्थल, विद्यालय और स्वास्थ्य केंद्र को शिफ्ट करने की आवश्यकता जताते हुए पत्राचार किया था, जो फिलहाल प्रक्रियाधीन है।
परियोजना का रूट और लागत
साहेबगंज–मानिकपुर फोरलेन परियोजना NH-139W का अहम हिस्सा है। यह सड़क मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज से शुरू होकर सारण जिले के मानिकपुर (छपरा) तक जाती है। इसकी कुल लंबाई लगभग 42 से 44 किलोमीटर है।
इस परियोजना पर करीब 800 से 900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसमें फोरलेन सड़क निर्माण के साथ-साथ भूमि अधिग्रहण, छोटे पुल-पुलिया और भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संरचनात्मक कार्य शामिल हैं।
क्यों अहम है यह फोरलेन?
इस फोरलेन के पूरा होने से पटना–बेतिया कॉरिडोर को नई गति मिलेगी। गंडक नदी पर प्रस्तावित पुल के जरिए यह मार्ग केसरिया और अरेराज होते हुए पश्चिम चंपारण तक सीधा संपर्क देगा। इससे उत्तर बिहार की कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ-साथ व्यापार, कृषि और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।


