सरकारी दावों की खुली पोल, फरीदाबाद में पेंशन बनवाने के लिए भटक रहे लोग; क्या कहते हैं आंकड़े?
सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में बहुत अंतर होता है। इसके कई उदाहरण समय-समय पर सामने आते रहते हैं।
सरकार का एक दावा यह भी है कि सामाजिक पेंशन बनवाने के लिए लोगों को चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जैसे ही पात्र होंगे तो पेंशन बन जाएगी। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। बिना धक्के खाए पेंशन बन ही नहीं रही है।
वहीं, मंगलवार को दैनिक जागरण संवाददाता ने सेक्टर-12 स्थित परिवार पहचान पत्र केंद्र और सेक्टर-15ए स्थित जिला समाज कल्याण विभाग में परेशान घूम रहे कुछ लोगों से बात की तो सच्चाई सामने आई। लोग कई-कई चक्कर लगा चुके हैं लेकिन बुढ़ापा, विधवा सहित अन्य श्रेणी की पेंशन नहीं बन रही है।
इस तरह करनी पड़ रही भागदौड़
यदि किसी की उम्र 60 साल हो गई है तो उसे सबसे पहले किसी कामन सर्विस सेंटर पर जाकर अपने खाते को परिवार पहचान पत्र से लिंक कराना होगा। इसके करीब सप्ताह भर बाद पेंशन से संबंधित असल दस्तावेज ले जाकर सेक्टर-12 में परिवार पहचान पत्र केंद्र जाकर अपडेट कराने होंगे। यहां लंबी लाइन लगी होती है। कई बार घंटों में नंबर आता है। यहां ऑनलाइन तीन चरणों में अपडेशन होती है।
इसके बारे में पता करने के लिए भी कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। फिर 10 से 20 दिन बाद सेक्टर-15ए स्थित जिला समाज कल्याण विभाग जाकर पता करना होता है कि ऑनलाइन आवेदन यहां आया है या नहीं। इसके लिए भी तीन से चार चक्कर लगते हैं।
कई बार विभाग की ओर से मोबाइल फोन पर मैसेज नहीं भेजा जाता कि पेंशन बनवाने के लिए फोटो खिंचवाने आ जाओ। फोटो खींचने के बाद भी पेंशन का पता नहीं होता कि अगले महीने आएगी या नहीं। इसके लिए भी चक्कर काटने पड़ जाते हैं। यहां बैठे कर्मचारी एक ही जवाब देते हैं कि जल्द पेंशन आ जाएगी, आप घर चले जाओ।
दलाल सक्रिय, ले रहे पांच से सात हजार
बार-बार चक्कर काटने से बचने के लिए लोग दलालों के चंगुल में आ जाते हैं। जिला समाज कल्याण विभाग में एक ऐसे ही बुजुर्ग मिले। उन्होंने बताया कि वह अनपढ़ हैं, इसलिए कागजी कार्रवाई के बारे में कोई जानकारी नहीं है। एक दलाल ने उनसे पांच हजार रुपये ले लिए लेकिन फिर भी चक्कर काटने पड़ रहे हैं।


