डेढ़ करोड़ की जीएसटी चोरी मामले में दिल्ली के निवासी 25 हजार के इनामिया आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। 2024 में वह दिल्ली डीटीएस रोडवेज में संविदा चालक की नौकरी छोड़कर महोबा आया। यहां उसने फर्जी तरीके से फर्म बनाई और मकान खरीदकर बोर्ड आदि लगाए।
उसने दूसरी कंपनियों से सांठगांठ कर फर्म के बिलों का उपयोग किया और बिना माल की खरीद फरोख्त के केवल बिलो पर ही क्रेता फर्म को जीएसटी का लाभ दे दिया। लेकिन देय जीएसटी की राशि जमा नहीं की गई।
पूर्व प्लानिंग के तहत जीएसटी की चोरी की। आईटीसी का लाभ क्रेता फर्म ने ले लिया। सोमवार को फर्जीवाड़ा करने वाले फर्म मालिक को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।
सहायक आयुक्त विशेष अनुसंधान शाखा राज्य कर बांदा जुबैद अहमद ने 8 जुलाई 2025 को शहर कोतवाली में तहरीर दी। जिसमें बताया कि शहर के डीएम आवास के पास ऊर्जा पेट्रोकेम की फर्म है और इसका प्राेपराइटर नीरेंद्र कुमार दीक्षित निवासी 3/303 खिचरीपुरा नियर कल्याणपुरी बस स्टैंड मयूर बिहार पूर्वी दिल्ली है।
उसने कार्यालय सहायक आयुक्त कर महोबा में पेट्रोलियम आयल्स एवं बिटुमिंस की खरीद व बिक्री के लिए जीएसटी पंजीयन प्राप्त किया।
फर्म के डाटा एनालिसिस करने पर पाया गया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में सत्यम इंटरप्राइजेस झांसी से 46.32 लाख की इनवर्ड सप्लाई प्राप्त करना घोषित करते हुए 8.33 लाख की आईटीसी क्लेम करते हुए प्रयोग की गई, जबकि सत्यम इंटरप्राइजेज झांसी का पंजीयन प्रपर अधिकारी द्वारा एक अक्टूबर 2024 को निरस्त किया गया।
इसी तरह आरोपित की फर्म ने 2023-24 सर्वश्री सलम एंड संस ट्रेडर्स दिल्ली को 11.90 लाख व वित्तीय वर्ष 2024-25 में 119.65 लाख की आउटवर्ड आपूर्ति किया जाना घोषित किया गया। 21 दिसंबर 2024 को फर्म की जांच की गई।
मौके पर यह फर्म नहीं पाई गई। फर्म का कोई भी बोर्ड नहीं लगा मिला और न ही कोई व्यापारिक गतिविधियां पाई गईं। व्यापारिक वस्तुओं का स्टाक भी नहीं मिला। तीन समन जारी हुए पर वह उपस्थित नहीं हुए। इनके द्वारा किसी माल की वास्तविक आउट वर्ड सप्लाई किए बिना ही बोगस फेक टैक्स इनवाइस जारी करते हुए आईटीसी क्लेम का उपयोग करते हुए राजस्व की हानि की गई।


