भाजपा सरकार बनी तो बुंदेलखंड के हालात बदले, अब उसी भाजपा के खेवनहार उसी बुंदेली धरा से अनुशासन तार-तार कर रहे हैं। महोबा के चरखारी के भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत ने जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के काफिले को 100 प्रधानों के साथ बीच रास्ते गाड़ियां अड़ाकर रोका और जल जीवन मिशन के अधूरे कार्यों, गांव-गांव बदहाली की पोल खोली तो राजनीति गर्म हो गई है।
विधायक से प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने जवाब-तलब किया है। कार्रवाई क्या होगी ये वक्त बताएगा। हां, इतना साफ है कि विधायक के बयान तात्कालिक नहीं, सोचे-समझे हैं, जो अब तक इंटरनेट मीडिया पर दिख रहे हैं। विधायक बोले थे कि समस्याएं होंगी तो मुख्यमंत्री तक को घेरेंगे और फिर इससे पलटने के भी अपने मायने हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उन पर व उनके पिता पूर्व सांसद गंगाचरण राजपूत पर भाजपा का विरोध करने के आरोप भी लग चुके हैं। अब बात निकली है तो दूर तलक जा सकती है, क्योंकि केवल बुंदेलखंड ही नहीं, कानपुर तक विरोधी सुर मुखर हैं।
पानी (सूखा), पकड़ (डकैत), पलायन (बेरोजगारी), कट्टा (बंदूक का शौक) और फट्टा (जुआ) के कारण संकट में घिरा रहने वाला बुंदेलखंड अब समृद्धि की राह पर है। जहां मालगाड़ी से पानी आता था, वहां सिंचाई, पेयजल की परियोजनाएं आईं। अब महोबा के 50 गांवों में जल जीवन मिशन के अंतर्गत हुए कार्यों के बहाने चरखारी के भाजपा विधायक बृजभूषण राजपूत के विरोधी सुर नए संकेत दे रहे हैं। उनके झगड़े के बाद लगातार इंटरनेट मीडिया पर आ रहे वीडियो रोज नया बखेड़ा खड़ा कर रहे हैं।
बृजभूषण परिवार पहले भी सुर्खियों में रहा
बृजभूषण के परिवार का राजनीतिक इतिहास भी कुछ ऐसा ही रहा है। उनके पिता गंगाचरण राजपूत ने भी सोनिया गांधी के पीएम पद को ठुकराने पर दिल्ली में अपनी कनपटी पर रिवाल्वर तान ली थी। गंगाचरण बुंदेलखंड में लोधी, पिछड़ों व निचले तबके बीच अच्छी पैठ वाले नेता माने जाते हैं। इससे बुंदेलखंड ने अंगड़ाई ली है। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव ने इसे पाटने के लिए झांसी में कहा कि विधायक को सर्किट हाउस में मिलना चाहिए था।


