बिना चिकित्सकीय सलाह के अपने मन से दवाएं खाना कितना खतरनाक हो सकता है, इसका चौंकाने वाला उदाहरण बीआरडी मेडिकल कालेज के चर्म रोग विभाग में सामने आया है। बीते एक वर्ष में यहां ऐसे 36 गंभीर मरीज पहुंचे, जिनकी त्वचा काली पड़ गई थी, कई जगहों से उघड़ चुकी थी और मांसपेशियां तक दिखाई देने लगी थीं। मरीजों की हालत ऐसी थी मानो शरीर झुलस गया हो। जांच में सामने आया कि इन सभी लोगों ने सामान्य बीमारी या एलर्जी समझकर अपने स्तर पर दवाएं ली थीं, जो शरीर में जाकर गंभीर रिएक्शन का कारण बन गईं।
इनमें से 20 अति गंभीर रोगियों पर विभागाध्यक्ष डा. राजकुमार के निर्देशन में गौरव प्रसाद ने अध्ययन कर कारण जानने की कोशिश की। इनकी उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच में थी। इन्होंने झटके की दवा, दर्द-बुखार, गठिया, एंटीबायोटिक, स्टेरायड अपने मन से लिया था। कुछ मरीज केवल इतना बता सके कि उन्हें बुखार हुआ था और मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा लिए थे, वे दवा का नाम व प्रकृति नहीं बता सके।
चिकित्सकों के अनुसार, यह समस्या ड्रग रिएक्शन या दवा से होने वाली गंभीर एलर्जी के कारण हुई। कई मामलों में मरीजों की त्वचा जलने जैसी हो गई थी, तेज दर्द, बुखार और शरीर में सूजन भी थी। हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि उन्हें लाकर भर्ती कराना पड़ा। चर्म रोग विभाग के डाक्टरों ने बताया कि 20 मरीजों में से 10 ऐसे थे, जो दवा खाने के बाद 72 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंच गए।
उन्हें तत्काल राहत देने के लिए एक कंपनी से अनुरोध कर एक विशेष दवा (इंजेक्शन) मंगवाकर लगाई गई, यह दवा 72 घंटे के अंदर ही काम करती है। इससे एक सप्ताह से 10 दिन के भीतर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हालांकि पूरी तरह स्वस्थ होने में इन्हें भी 14 से 15 दिन का समय लगा। वहीं शेष 10 मरीज देर से अस्पताल पहुंचे थे, जिनपर यह इंजेक्शन काम नहीं करता, इसलिए कालेज में उपलब्ध दवाओं से इलाज किया गया। इन मरीजों को ठीक होने में 25 दिन से अधिक का समय लगा।
डॉक्टरों का कहना है कि अपने मन से दवा खाना आज एक गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। सिरदर्द, बुखार, खुजली या एलर्जी जैसी छोटी-सी परेशानी में लोग मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा लेते हैं या पुराने पर्चे की दवाएं दोबारा शुरू कर देते हैं। कई बार स्टेरायड, एंटीबायोटिक या दर्द निवारक दवाएं बिना जरूरत और बिना मात्रा जाने ली जाती हैं, जो शरीर के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती हैं।
दवाओं का गलत उपयोग न सिर्फ त्वचा को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि किडनी, लिवर और हृदय पर भी गंभीर असर डाल सकता है। कुछ मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है। खासतौर पर एलर्जी प्रवृत्ति वाले लोगों में दवा का रिएक्शन अचानक और बेहद तेज हो सकता है, जिससे पूरे शरीर की त्वचा उघड़ने लगती है।


