इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू बने कांधला के एक परिवार के लिए एसआइआर में पहचान का संकट खड़ा हो गया है। मुस्लिम नामों के साथ मतदाता सूची में दर्ज रहे इस परिवार के मुखिया समेत आठ सदस्यों ने हिंदू नाम तो अपना लिए, लेकिन अब विशेष प्रगाढ़ मतदाता पुनरीक्षण ने उनकी राह रोक दी है। प्रशासन अब नोटिस जारी कर हिंदू धर्म के पुख्ता दस्तावेजी सबूत मांग रहा है, जबकि पुराने रिकार्ड में उनके पूर्व नाम दर्ज हैं।
जिले में विशेष प्रगाढ़ मतदाता पुनरीक्षण अभियान (SIR) में मैपिंग न होने वाले 55 हजार 424 मतदाताओं को जारी नोटिस की सुनवाई चल रही है। कांधला के रायजादगान निवासी संजू के परिवार के आगे पहचान का संकट खड़ा हो गया है। संजू के बेटे विकास कुमार ने बताया कि साल 2003 से पहले उनका परिवार हिंदू था। किन्हीं कारणों से इसके बाद मुस्लिम धर्म अपना लिया था।
धर्मांतरण के बाद विकास का नाम राशिद, उसके पिता संजू का नाम उमर, मां नीता का नाम इमराना, भाई दीपक और संदीप का नाम अशरफ और आदिल रख दिया गया था। अगस्त 2021 में फिर से परिवार मूल हिंदू धर्म में वापस आ गया। सभी के पूर्व नाम रख दिए गए, आधार कार्ड में नाम संशोधित करा लिए लेकिन वोटर लिस्ट में मुस्लिम नाम ही चढ़ा रह गया।
एसआइआर में आवेदन किया था और नए हिंदू नामों के साथ वोट की अपील की गई थी, लेकिन उनके वोट नहीं बन पा रहे हैं। मतदाता सूची व दस्तावेजों में मिसमैच होने के कारण नोटिस भेजे गए हैं।
10 फरवरी तक नोटिस की सुनवाई का समय निर्धारित
10 फरवरी तक नोटिस की सुनवाई का समय निर्धारित है। एसडीएम सदर अर्चना शर्मा ने स्पष्ट किया है कि राज्य निर्वाचन की गाइडलाइन और नियमानुसार साक्ष्यों को दिखवाते हुए कार्रवाई की जाएगी। विकास का कहना है कि 2003 की मतदाता सूची में सिर्फ दादा अमीचंद का नाम दर्ज है। वर्तमान मतदाता सूची में हमारे मुस्लिम नाम होने और 2003 में दादा का हिंदू नाम होने की वजह से हमसे प्रमाण मांगा जा रहा है। हमारे पास दादा के नाम के अलावा कोई प्रमाण नहीं है।


