सफलता बड़ी ज़िम्मेदारियों के साथ आती है। जब आप एक सफल व्यक्ति बन जाते हैं, तब लोग आपको एक उदाहरण के रूप में देखते हैं। शारीरिक और मानसिक फिटनेस जीवन की किसी भी विधा में सफलता के लिए आवश्यक है। खेल हमें सफलताओं को संभालने और असफलताओं के साथ सामंजस्य बैठाना सिखाता है।
यह उद्गार एनसीएल के दुधिचुआ ग्राउंड में आयोजित यंग अचीवर्स प्रोग्राम के तहत लर्निंग फ्राम लीजेंड कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए भारतीय फुटबाल टीम के पूर्व कप्तान, पद्मश्री एवं अर्जुन अवार्ड से सम्मानित बाइचुंग भूटिया ने व्यक्त किए।
भूटिया ने फुटबाल के मैदान के अपने अनुभवों को जीवन के विविध आयामों से जोड़ा। उन्होंने फिटनेस पर अपनी बात रखते हुए कहा कि अच्छे फ़ूड हैबिट के साथ अल्पाहार और नियमित व्यायाम फिट रहने के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने योग और सूर्य नमस्कार को नियमित आचरण में लाने के लिए प्रेरित किया।
अभिभावकों को बच्चों की रुचि के अनुसार कैरियर चुनने की आजादी देने और उसी अनुरूप वातावरण उपलब्ध कराने का सुझाव देते हुए भूटिया ने कहा कि सिक्किम के छोटे से गांव तिंकिताम से निकलकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले व्यक्ति के रूप में, अगर आप में प्रतिभा है तो संसाधनों की कमी आपकी सफलता में कभी बाधा नहीं बन सकती।
उन्होंने बच्चों को अपने जुनून को फॉलो करने और चुनौतियों के लिए सदैव तत्पर रहने की सीख दी। सीएमडी एनसीएल बी साईराम ने कहा कि फिजिकल एंड्यूरेंस के साथ मानसिक स्थिरता के बल पर भूटिया ने विश्वस्तरीय सफलता अर्जित की है।
भारत में फुटबाल के प्रति बढ़ते रुझान के आलोक में भूटिया ने सिंगरौली परिक्षेत्र के युवाओं को फ़ुटबाल सहित अन्य खेलों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि खेल न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक विकास में भी सहायक होता है।
भूटिया ने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहना चाहिए और कठिनाइयों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि असफलता से डरने की बजाय, हमें उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।


