देश के सबसे स्वच्छ शहर का दर्जा हासिल कर चुके इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार सुबह लक्ष्मी रजक नामक महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही इस क्षेत्र में दूषित पानी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 30 हो गई है।
इससे पहले मंगलवार को उल्टी-दस्त से पीड़ित 75 वर्षीय खूबचंद (पिता गन्नुदास) की भी उपचार के दौरान मौत हो गई थी। लगातार हो रही मौतों ने स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश दोनों ही बढ़ा दिए हैं।
बुधवार को लक्ष्मी रजक की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय निवासियों ने आक्रोश जताते हुए सड़क पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। इस दौरान इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई और कुछ समय तक यातायात बाधित रहा। बाद में प्रशासन और सामाजिक नेताओं की समझाइश के बाद लोग शांत हुए और अंत्येष्टि के लिए शव लेकर श्मशान घाट रवाना हुए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दूषित पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए। लोगों का आरोप है कि स्वच्छता अभियान और पुरस्कारों के बावजूद भागीरथपुरा जैसे क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।
स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और प्रभावित क्षेत्र में मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि दूषित पानी की आपूर्ति रोकने और वैकल्पिक व्यवस्था करने के प्रयास किए जा रहे हैं।


