भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। इस बार विवाद का केंद्र दालों पर लगाया गया आयात शुल्क है। दो अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर भारत द्वारा अमेरिकी दालों पर लगाए गए 30 प्रतिशत आयात शुल्क को हटाने का दबाव बनाने की मांग की है।
विवाद की जड़
भारत ने हाल ही में अमेरिकी दालों पर 30% आयात शुल्क लगाया है। यह कदम अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाने के बाद उठाया गया। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि भारत का यह निर्णय अनुचित है और इससे अमेरिकी किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। उनका आरोप है कि नई दिल्ली की नीति अमेरिकी उत्पादकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता को कमजोर कर रही है।
ट्रंप प्रशासन पर दबाव
अमेरिकी सांसदों ने अपने पत्र में राष्ट्रपति ट्रंप से आग्रह किया है कि वे भारत पर दबाव डालें और दालों पर लगाए गए आयात शुल्क को हटवाएं। उनका कहना है कि यदि यह टैरिफ बरकरार रहा तो अमेरिका-भारत के बीच चल रही ट्रेड डील की बातचीत और कठिन हो जाएगी।
भारत का पक्ष
भारत का तर्क है कि दालों पर आयात शुल्क घरेलू किसानों की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए लगाया गया है। भारत में दाल उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए यह कदम उठाया गया। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि यह नीति घरेलू बाजार को स्थिर रखने के लिए आवश्यक है।
संभावित असर
- वार्ता पर असर: दालों पर टैरिफ विवाद से ट्रेड डील की बातचीत और जटिल हो सकती है।
- किसानों पर असर: अमेरिकी किसान नुकसान की शिकायत कर रहे हैं, जबकि भारतीय किसान इसे सुरक्षा मानते हैं।
- राजनीतिक दबाव: अमेरिकी सांसदों का दबाव ट्रंप प्रशासन को भारत के साथ वार्ता में सख्त रुख अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
विशेषज्ञों की राय
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो यह विवाद न केवल ट्रेड डील बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है। भारत और अमेरिका दोनों ही बड़े कृषि उत्पादक देश हैं और ऐसे में दालों पर टैरिफ का मुद्दा दोनों के लिए संवेदनशील है।
निष्कर्ष
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील की राह दालों पर टैरिफ विवाद से और कठिन हो गई है। भारत इसे घरेलू किसानों की सुरक्षा का कदम मानता है, जबकि अमेरिका इसे अनुचित व्यापार नीति कह रहा है। यदि दोनों पक्ष जल्द समाधान नहीं निकालते, तो यह विवाद द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों को गहरे संकट में डाल सकता है।


