सरकारी अस्पताल में दवाओं की किल्लत, मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही महंगी दवाएं
दो दिन के साप्ताहिक अवकाश के बाद सोमवार को शहर का सामान्य अस्पताल तो खुल गया, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की पटरी पर दवाओं की कमी का संकट साफ दिखाई दिया। सुबह से ही अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोग इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार के बाद जब वे दवा काउंटर पर पहुंचे तो उन्हें निराशा हाथ लगी। कई आवश्यक दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं, जिसके चलते डॉक्टरों को मजबूरी में मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने की सलाह देनी पड़ी।
अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे मरीज केला देवी, प्रीती, मनोज और राजेश ने बताया कि वे दूर-दराज के गांवों से इस उम्मीद में आते हैं कि सरकारी अस्पताल में उन्हें मुफ्त इलाज और दवाएं मिलेंगी। लेकिन वर्तमान हालात ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मरीजों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए बाहर से महंगी दवाएं खरीदना बेहद कठिन है।
दवाओं की कमी से बढ़ी परेशानी
अस्पताल में इस समय जिन दवाओं की कमी बनी हुई है, उनमें विटामिन डी और बी-12 की गोलियां व इंजेक्शन, खांसी और एलर्जी के सिरप, तथा विभिन्न प्रकार के मल्टीविटामिन शामिल हैं। ये दवाएं आमतौर पर मरीजों के उपचार में सबसे अधिक उपयोग की जाती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन दवाओं की अनुपलब्धता के कारण उन्हें मरीजों को अधूरा इलाज देकर बाहर की दुकानों से दवाएं खरीदने की सलाह देनी पड़ रही है।
गरीब मरीजों पर सबसे बड़ा असर
आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों ने बताया कि वे सरकारी अस्पताल का रुख इसलिए करते हैं ताकि उन्हें मुफ्त इलाज और दवाएं मिल सकें। लेकिन जब अस्पताल में ही दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो उन्हें बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। कई मरीजों ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वे बाहर से दवाएं खरीद सकें। इस वजह से कई लोग इलाज अधूरा छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
डॉक्टरों की मजबूरी
अस्पताल के डॉक्टरों ने भी माना कि दवाओं की कमी के कारण उन्हें मरीजों को बाहर की दुकानों से दवाएं लेने की सलाह देनी पड़ रही है। उनका कहना है कि यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है। डॉक्टरों ने बताया कि जब तक अस्पताल में आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक मरीजों को सही और संपूर्ण इलाज देना संभव नहीं है।
प्रशासन पर सवाल
स्थानीय लोगों और मरीजों ने अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब अस्पताल में दवाओं का स्टॉक खत्म हो जाता है, तो समय रहते उसकी पूर्ति क्यों नहीं की जाती। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को इस समस्या पर तुरंत ध्यान देना चाहिए, ताकि मरीजों को बाहर की दुकानों पर निर्भर न रहना पड़े।
निष्कर्ष
शहर के सामान्य अस्पताल में दवाओं की कमी ने स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति को उजागर कर दिया है। गरीब और ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों के लिए यह समस्या और भी बड़ी है। यदि समय रहते दवाओं की आपूर्ति नहीं की गई, तो मरीजों की परेशानी और बढ़ सकती है। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करे, ताकि मरीजों को मुफ्त इलाज और दवाएं मिल सकें और स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा कायम रहे।


